Saturday, January 3, 2009

इजरायल और हमास के बीच जमीन लडाई शुरू

इसराइली सेना और हमास के चरमपंथी अब ग़ज़ा पट्टी में आमने-सामने हैं. दोनों के बीच ज़मीनी लड़ाई शुरू हो गई है। इसराइल का अपनी ताज़ी कार्रवाई के बारे में कहना है कि ग़ज़ा पट्टी में सेना का प्रवेश और ज़मीनी लड़ाई इसलिए छेड़ी जा रही है ताकि ग़ज़ा के उन हिस्सों पर नियंत्रण किया जा सके जिनका इस्तेमाल हमास के चरमपंथी इसराइल पर हमले के लिए कर रहे है। शनिवार को ही इसराइली सेना ने ग़ज़ा पट्टी के उत्तरी इलाक़े में प्रवेश करना शुरू कर दिया था. इसराइल के टैंक ग़ज़ा पट्टी में प्रवेश करते देखे गए हैं और सीमावर्ती इलाकों से गोलीबारी और धमाकों की आवाज़ें भी सुनी गई है। उधर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपात बैठक पूरी स्थिति की समीक्षा करने के लिए बुलाई गई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि इसराइल को तुरंत ग़ज़ा पट्टी में अपनी ज़मीनी कार्रवाई रोक देनी चाहिए। बान की मून ने बताया कि उन्होंने इसराइल के प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट से बातचीत की है और अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। इसराइल फिलहाल पूरी तरह से युद्ध की मुद्रा में नज़र आ रहा है. इसराइल के रक्षा मंत्री एहुद बराक ने कहा है कि ज़मीनी कार्रवाई लंबी चल सकती है। इसराइल ने कहा है कि हमास बड़ी तैयारी के साथ है और इससे निपटने के लिए संघर्ष लंबा चल सकता है। उन्होंने कहा कि हमास ने इसके सिवा कोई और विकल्प नहीं छोड़ा है. एहुद बराक ने कहा कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता है लेकिन अपने नागरिकों को हमास के रॉकेट हमलों के लिए नहीं छोड़ सकता। इसराइल ने हज़ारों की संख्या में अपने रिजर्व सैन्य बल को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं क्योंकि उनका आकलन है कि ताज़ा अभियान लंबा चल सकता है। हमास अधिकारियों ने भी इसराइली सेना के घुसने की पुष्टि की है, लेकिन कहा है कि उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ज़मीनी लड़ाई के साथ-साथ टेलीविज़न तस्वीरों से साफ है कि हवाई हमले भी जारी है। इससे पहले आठ दिन से चल रहे आक्रमण में पहली बार इसराइली सेना ने तोपों का इस्तेमाल किया। तोपों के इस्तेमाल को गज़ा में इसराइली सेना की ज़मीनी कार्रवाई की तैयारी के रूप में देखा जा रहा था। हमास के ख़िलाफ़ किए जा रहे हमलों में अब तक 400 से अधिक लोग मारे जा चुके है।

Friday, January 2, 2009

कालिंजर में जमीन से निकली ब्रहृमा की मूर्ति लोगों में कौतुहल

राजस्थान राज्य के राजसमन्द जिले के कुम्भलगढ इलाके के कालिंजर गांव में बीती रात जमीन से ब्रह्मा की प्रतिमा निकलने से लोगों में कौतुहल पैदा हो गया है। पूजा-पाठ के बाद इस मूर्ति को गांव के मंदिर में रखाा गया है। मध्यप्रदेश से आए संत रामदास का दावा है कि उसका सपना हकीकत में बदला है। दो महीने से सपने में यह गांव और मूर्ति दिख रही थी। सपना सच होने की बात से जहां ग्रामीणों में श्रद्धा जाग गई है तो दूसरी ओर कई ग्रामीण ऐसे भी जिनके गले यह कहानी नहीं उतर रही है। वे इसे कोरा अंधविश्वास बता रहे है। प्रशासन ने इस सम्बन्ध में कुछ भी कहने से इनकार किया है।

कालिंजर गांव में मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले से आए संत रामदास ने सपने के बारे में बताकर खुदाई करने को कहा। संत ने कहा कि पिछले दो माह से उसके सपने में यह गांव और एक आदमी जालम दिख रहा था। रामदास ने खुदाई के लिए गुरुवार शाम सात बजे का समय नििश्चत किया। गांव के बीचो-बीच खण्डरनुमा कच्चे मकान में खुदाई शुरू की। करीब चार फीट तक की खुदाई के बाद रामदास उसमें उतरे। दस मिनट तक उस खड्डे के एक कोने में धूप-दीप किया। इसके बाद खड्डे को कपडे से ढक दिया गया। रात करीब साढे आठ बजे संत लाल कपडे में ढकी ब्रह्मा जी की एक छोटीे मूर्ति के साथ निकला। रामदास ने जल, दूध से स्नान कराकर मूर्ति के दशZन कराए। मूर्ति को ग्रामीणों ने श्रद्धा व्यक्त कर नमन किया। गांव में मूर्ति मिलने की खबर के बाद कालिंजर, सांयो का खेडा, कोयल, झीतरिया, गांगा का गुडा सहित राजसमन्द जिले के विभिन्न गांवों से लोगों का मूर्ति अवलोकन के लिए तांता लगा हुआ है।
इस मूर्ति और इसके पिछे की कहानी पर कई लोगों को संदेह भी है। कुछ लोग इसे चमत्कार तो कुछ अंधविश्वास बता रहे है। खुदाई के बाद कालिंजर के पूर्व सरपंच घासीराम गुर्जर ने कहा कि यह मूर्ति पुरानी नहीं लग रही है। ऐसा भी नहीं है कि लग रहा कि यह लम्बे समय तक जमीन में दबी रही हो। गांव के मोहनलाल गुर्जर का भी कुछ इसी तरह कहना है। गोपाल गुर्जर के अनुसार यह सब तंत्र विद्या के खेल से ज्यादा कुछ भी नहीं है।

भीख मांग कर पढाया बच्चों को

वह भगवान के नाम पर लोगों के सामने हाथ फैलाता। लोग जो कुछ देते उसी से अपना और परिवार का गुजारा चलाता लेकिन वह समय की चालक को भी पहचानता था। जिंदगी भर भीख मांग कर उसने चारों बच्चों को पढाया। आज उसका सबसे बडा पुत्र बीए अंतिम वशZ का छात्र है। यह कहानी है रूपनाथ की।
राजस्थान राज्य के राजसमन्द जिले की सांगावास पंचायत स्थित कुण्डेली गांव के रूपनाथ के सिर से छोटी उम्र में ही पिता का साया उठ गया। कुछ समय बाद मां भी उसे छोड गई। ऐसे में उसे और उसके तीन भाइयों को गांव के लोग खाने को दे देते थे। कुछ बडे होने पर चारों भाई भीख मांग गुजारा करने लगे। लोगों की दुत्कार और उपेक्षा रूपनाथ को अखरती थी। उसने तय किया कि अपने बच्चों से यह काम नहीं करवाएगा।
रूपनाथ के अनुसार उसने अपने चारों बच्चों को स्कूल में भर्ती कराया और तय किया कि िशक्षा में कभी रूकावट नहीं आने देगा। वह अपने साथियों के साथ भीख मांगने बडे शहरों में जाता जिस वशZ अच्छी भीख नहीं मिलती, कर्ज लेकर बच्चों की पढाई जारी रखी। लोगों ने खूब टोका परंतु वह जानता था कि आने वाला समय िशक्षितों का है उसके किसी भी भाई ने भी यह समझ नहीं दिखाई। रूपनाथ का बडा बेटा प्रभुनाथ आमेट महाविद्यालय से बीए कर रहा है। उसने छठी से 12वी तक जवाहर नवोदय विद्यालय राजसमन्द में पढाई की। छोटा बेटा राजूनाथ दसवीं में पढ रहा है इसी तरह खूमनाथ ने नवी में और छोटा बेटा दिनेश पांचवी में पढ रहा है। रूपनाथ के बारे में जब राजसमंद जिला कलक्टर को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने प्रभुनाथ को स्वरोजगार कर्ज के लिए रूरल पॉप योजना के तहत बैंक से ऋण देने के लिए आदेश दिए है।

भारत को नहीं सौंपेगे आतंकवादी : पाकिस्तान

पाकिस्तान ने मुंबई हमलों में शामिल या भारत द्वारा वांछित आतंकियों को भारत को सौंपने से साफ इनकार कर दिया है।पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं है। हम लोग अपना आंतरिक ढांचा बनाने में जुटे हैं। ऐसे समय इन बातों में फंसा जाएगा तो यह पाकिस्तान के लिए नुकसानदेह होगा।कुरैशी ने एक सवाल के जवाब में यह बात कही। उनसे पूछा गया था कि क्या भारत और अमेरिका ने लश्कर-ए-तैयबा के आपरेशन कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी, जैश-ए-मुहम्मद सरगना मसूद अजहर और हाफिज मुहम्मद सईद को भारत के हवाले करने की मांग रखी है? कुरैशी ने यह भी दोहराया कि अजहर पाकिस्तान की हिरासत में नहीं है।कुरैशी का यह बयान भारत को जवाब समझा जा रहा है। गुरूवार को भारतीय विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा था कि ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए प्रत्यर्पण संधि होना जरूरी नहीं है। मुखर्जी ने कहा था कि मुंबई हमले के संदिग्धों के खिलाफ पाकिस्तान को अभी कार्रवाई करनी है। उन्होंने यह भी कहा था कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के मद्देनजर वह ज्यादा दिनों तक कार्रवाई टाल नहीं सकेगा।पाकिस्तान का कहना है कि वह भारत के आरोपों की जांच अपने स्तर पर कर रहा है। कुरैशी ने बताया कि जांच काफी आगे बढ़ गई है, लेकिन उन्होंने इसका ब्यौरा नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अगर अभी ज्यादा कुछ बताया गया तो जांच पर असर पड़ सकता है। उन्होंने भारत से मुंबई हमलों में पाकिस्तानियों का हाथ होने का सुबूत मुहैया कराने की मांग भी दोहराई।कुरैशी ने एक बार फिर युद्ध का हौवा खड़ा करने की भी कोशिश की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को सूचना मिली है कि भारत उसकी सीमा में कुछ चुनिंदा ठिकानों पर हमले की योजना बना रहा है। यह भी कि पूर्वी कमान से नौसेना के जहाजों को पश्चिमी कमान भेज दिया गया है। कुरैशी बोले, इनके अलावा भी भारत की तैयारियों से जुड़ी जानकारियां पाकिस्तान के पास हैं, लेकिन मैं उनका खुलासा नहीं कर सकता।

मंगल पर उपग्रह 2013 में

विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक के राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि भारत 2013-16 तक मंगल ग्रह पर एक उपग्रह भेज सकता है।नायर सर्विस सोसायटी के संस्थापक नेता मन्नतु पद्मनाभन के 132 वें जयंती समारोह का उद्घाटन करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि वर्ष 2020 तक चंद्रमा पर मानव भेजने की तैयारियां चल रही हैं और इससे पहले 2015 तक सात दिन के लिए अंतरिक्ष में दो लोग भेजे जाएंगे।उन्होंने कहा कि चंद्रयान प्रथम अभियान ने साबित कर दिया कि यदि किसी संगठन के सदस्य एक दृष्टि के साथ काम करते हैं तो सब कुछ संभव है। राधाकृष्णन ने छात्रों से धन कमाने वाले पाठ्यक्रम अपनाने की बजाय विज्ञान और इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम में दाखिला लेने का आह्वान किया जो देश के लिए हितकर है।

Thursday, January 1, 2009

किलीनोची पर श्रीलंका के सैनिक का कब्ज़ा

पिछले एक दशक में पहली बार श्रीलंका के सैनिक तमिल विद्रोहियों के प्रशासनिक मुख्यालय किलीनोची में दाख़िल हुए हैं. एलटीटीई की तरफ़ से इस पर कोई बयान नहीं आया है
श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उसके सैनिकों ने शहर में कदम रखा है और उन्होंने शहर के उत्तरी भाग में स्थित एक महत्वपूर्ण सड़क काराडिपोक्कु पर कब्ज़ा कर लिया है
लगभग दस साल पहले तमिल विद्रोही संगठन लिब्रेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) ने इस शहर पर कब्ज़ा कर इसे अपना प्रशासनिक मुख्यालय बनाया था कई महीनों से श्रीलंका की सेना तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के कड़े विरोध के बावजूद किलीनोची पर कब्ज़ा जमाने के लिए भीषण संघर्ष कर रही थी एलटीटीई की तरफ़ से इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन विद्रोहियों ने पिछले हफ़्ते कहा था कि वे सफलतापूर्वक शहर का बचाव कर रहे हैं पिछले कुछ महीनों में दोनों पक्षों ने देश के उत्तरी भाग में जारी लड़ाई में एक दूसरे को भारी क्षति पहुँचाई है ग़ौरतलब है कि श्रीलंका की सेना ने हाल में किलीनोची के उत्तर में स्थित पारंथन क़स्बे को घेर लिया था जो तमिल विद्रोहियों के लिए सामरिक महत्व का है सेना ने वहाँ हुई लड़ाई में कम से कम 50 तमिल विद्रोहियों के मारे जाने का दावा भी किया था श्रीलंका में अल्पसंख्यक तमिल पिछले दो दशक से अधिक समय से अलग राज्य की माँग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं

वह मर गया लेकिन डॉक्टरों ने उसे जीवित कर दिया

इसे विज्ञान का चमत्कार कहें या किस्मत का खेल कि 68 साल की उम्र वाले एक मरीज का हृदय. फेंफडे और अन्य जरूरी अंग काम करना बंद कर देने के बाद भी एक सप्ताह के भीतर डाक्टरों के अथक प्रयास से उसकी हालत में आश्चर्यजनक सुधार हुआ है।इंदौर के सीएचएल अपोलो अस्पताल में 24 दिसंबर को मरणासन्न स्थिति में गुलाब चंद डोंगरे जब भर्ती कराया गया तब वह पूरी तरह से अचेत अवस्था थे और आंख भी नहीं खोल पा रहे थे। मशीनें भी उनकी नब्ज तथा रक्तचाप नापने में असमर्थ साबित हुई । ईसीजी मशीन ने उनके हृदय को पूरी तरह से ब्लॉक बता दिया।अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डा. नितिन मोदी और डा.सुधीर खेतावत के नेतृत्व में चिकित्सकों के एक दल ने डोंगरे को बचाने की अंतिम कोशिश के तहत उन्हें अस्थायी पेसमेकर और रेस्पिरेटरी वेंटिलेटर पर रखा। डाक्टरों की निरंतर निगरानी में मरीज के हृदय. फेंफड़े और श्वसन तंत्र का इलाज किया गया और एक सप्ताह के भीतर उनकी हालत में चमत्कारिक सुधार देखने को मिला।डा. खेतावत ने बताया कि एक सप्ताह में ही डोंगरे के हृदय और फैंफ.ड़ों की हालत में सुधार को देखते हुये वेंटिलेटर हटा दिया गया और वह न केवल अपनी आंख खोलकर हाथ पैर चलाने लगे बल्कि उनके शरीर के अन्य अंगों में भी गतिशीलता देखने को मिली । उन्होंने बताया कि इतनी गंभीर हालत में लाये गये किसी मरीज में महज एक सप्ताह में इतना सुधार उन्होंने पहले कभी नहीं देखा । डा. खेतावत ने डाक्टरों की अथक मेहनत और मरीज की प्रतिरोधक क्षमता को इस चमत्कार का श्रेय दिया है।