जब से लालू प्रसाद यादव ने रेलवे में मुनाफा बढाना क्या शुरू कर दिया है उन्हें सभी लोग मेनेजमेंट गुरु के रूप में पूजने लगे है। अब देखो लम्बी-चौडी पढाई करने वाले मेनेजमेंट गुरुओ का जमाना नहीं रहा अब लालू ही मेनेजमेंट के फण्डे सिखाएंगे वह भी जापना के छात्रों को रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव अब भारतीय रेल के कायाकल्प के बारे में जापानी स्टूडंट्स को भी मैनिजमंट मंत्र से रू-ब-रू कराएंगे। इससे पहले वह अहमदाबाद में मौजूद इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनिजमंट और और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडंट्स को प्रबंधन के गुर सीखा चुके हैं। रेल मंत्री के निकट सहयोगी व राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता श्याम रजक ने बताया कि लालू जापान सरकार के निमंत्रण पर 11 जनवरी को 10 दिवसीय यात्रा पर रवाना होंगे। वहां की रेल व्यवस्था का अध्ययन करने के अलावा लालू तोक्यो सहित कई यूनिवर्सिटी में इंडियन रेल के कायाकल्प के बारे में लेक्चर भी देंगे। रजक ने कहा कि संकट के दौर से गुजर रहे भारतीय रेलवे को लालू ने उबारा और वर्तमान वित्त वर्ष में उन्होंने एक लाख करोड़ मुनाफे का आश्वासन दिया है।
Sunday, January 4, 2009
दुश्मनों के दांत खट्टे करने के लिए किजिए ऑन लाइन गांधीगिरी
शहर में अपराधियों के आज़ाद घूमने पर आपको किसी मंत्री के खिलाफ गुस्सा जाहिर
करना हो या तेज़ आवाज़ में म्यूजिक बजाने वाले पड़ोसी का विरोध करना हो, अब आप इन्हें ग्रीटिंग्स कार्ड के जरिए अलग अंदाज में शर्मसार कर सकते हैं। आपकी इस मुश्किल को आसान कर दिया है www.papam.in ने। इसके ज़रिए व्यंग्यपूर्ण और अहिंसक तरीके से विरोध प्रदर्शन कर अपने विरोधी को शर्मसार करने के लिए आप उसे कार्ड भेज सकते हैं। www.papam.in के डायरेक्टर ने कहा, ' हमारी साइट पर कार्ड संबंधित लोगों के व्यक्तिगत, स्थानीय और राष्ट्रीय हितों से जुड़ीं चिंता के मुद्दे पर उनके दर्द को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं। शुरुआती तौर पर इस सीरीज़ में कुल 14 आम मुद्दों को शामिल किया गया है। मनीष पाठक ने काह, ' इस सीरीज़ को नए कारणों और चिंताओं के साथ अपडेट किया जाता रहेगा। इस पहल से लोग उग्र प्रदर्शन और हिंसा किए बिना सामाजिक मुद्दों पर अभियान भी चला सकेंगे। ' गांधीगीरी कार्ड्स को ऑनलाइन चुना जा सकता है और फिर वग कुरियर के जरिये संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाए जाएंगे। मनीष पाठक के मुताबिक, अधिकारी या मंत्री के लिए जहां उसके खिलाफ उग्र प्रदर्शन टालना आसान होगा, लेकिन डाक के ज़रिए मिले ग्रीटिंग कार्ड को अस्वीकार करना बेहद मुश्किल होगा।
करना हो या तेज़ आवाज़ में म्यूजिक बजाने वाले पड़ोसी का विरोध करना हो, अब आप इन्हें ग्रीटिंग्स कार्ड के जरिए अलग अंदाज में शर्मसार कर सकते हैं। आपकी इस मुश्किल को आसान कर दिया है www.papam.in ने। इसके ज़रिए व्यंग्यपूर्ण और अहिंसक तरीके से विरोध प्रदर्शन कर अपने विरोधी को शर्मसार करने के लिए आप उसे कार्ड भेज सकते हैं। www.papam.in के डायरेक्टर ने कहा, ' हमारी साइट पर कार्ड संबंधित लोगों के व्यक्तिगत, स्थानीय और राष्ट्रीय हितों से जुड़ीं चिंता के मुद्दे पर उनके दर्द को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं। शुरुआती तौर पर इस सीरीज़ में कुल 14 आम मुद्दों को शामिल किया गया है। मनीष पाठक ने काह, ' इस सीरीज़ को नए कारणों और चिंताओं के साथ अपडेट किया जाता रहेगा। इस पहल से लोग उग्र प्रदर्शन और हिंसा किए बिना सामाजिक मुद्दों पर अभियान भी चला सकेंगे। ' गांधीगीरी कार्ड्स को ऑनलाइन चुना जा सकता है और फिर वग कुरियर के जरिये संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाए जाएंगे। मनीष पाठक के मुताबिक, अधिकारी या मंत्री के लिए जहां उसके खिलाफ उग्र प्रदर्शन टालना आसान होगा, लेकिन डाक के ज़रिए मिले ग्रीटिंग कार्ड को अस्वीकार करना बेहद मुश्किल होगा।
नेपाल सरकार स्थानीय पुजारियों को ही नियुक्त करेगी
काठमांडू स्थित मशहूर पशुपतिनाथ मंदिर में स्थानीय नेपाली पुजारियों को नियुक्त करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है और इसका विरोध भी बढ़ रहा है। लेकिन नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि पशुपतिनाथ मंदिर में नेपाली पुजारियों को नियुक्त करने के फ़ैसले पर वह क़ायम है। भारत में मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना ने भी नेपाल सरकार के इस फ़ैसले का विरोध किया है। भारत में इसके विरोध में प्रदर्शन भी हो रहे हैं.
नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति पर प्रतिबंध लगाने के फ़ैसले के बावजूद नेपाल सरकार ने ये नियुक्ति की है। गुरुवार को सरकार ने ब्राह्मण पुजारियों को हटाकर स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति की घोषणा की थी. इसके बाद से ही सरकार के क़दम का विरोध हो रहा है।
दरअसल वर्षों से पशुपतिनाथ मंदिर में प्रमुख पुजारी की भूमिका दक्षिण भारत के ब्राह्मण निभाते हैं, जिन्हें भट्ट कहा जाता है। उनका सहयोग स्थानीय नेपाली पुजारी करते हैं, लेकिन उनका क़द ब्राह्मण पुजारियों से छोटा होता है। पारंपरिक रूप से नेपाल नरेश ही देश के सर्वोच्च पुजारी की नियुक्ति करते थे लेकिन राजशाही की समाप्ति के बाद माओवादियों के नेतृत्व में बनी सरकार स्थानीय पुजारियों को इस सम्मानित पद पर नियुक्त करना चाहती है। नेपाल में अभी नया संविधान नहीं लिखा गया है, इसलिए इस मामले पर अभी क़ानून स्पष्ट नहीं है कि किसे पुजारियों की नियुक्ति का अधिकार है। नेपाल के संस्कृति मंत्री गोपाल किराती का कहना है कि सरकार स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति के अपने फ़ैसले पर क़ायम है। गुरुवार को सरकार के फ़ैसले के बाद से ही अन्य पुजारियों ने मंदिर के धार्मिक समारोहों से अपने को अलग कर लिया है। मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस और अन्य हिंदू संगठन भी सरकार के इस फ़ैसले का विरोध कर रहे हैं. पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव का मंदिर है और नेपाल के अलावा भारत में भी यह मंदिर काफ़ी मशहूर है। दूसरी ओर पशुपतिनाथ मंदिर के पुजारी सरकार के इस फ़ैसले को धार्मिक मामलो में राजनीतिक हस्तक्षेप बता रहे हैं. पूर्व नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने भी इस विवाद के हल की अपील की है।
ज्ञानेंद्र के सहयोगी पन्हीराज पाठक ने बताया, "ज्ञानेंद्र ने नेपाल सरकार, भक्तों और अन्य लोगों से अपील की है कि वे पशुपतिनाथ मंदिर को राजनीति से ऊपर रखें. उन्होंने कहा है कि आस्था, परंपरा और धार्मिक आचरण हमारे अधिकार और हमारे जीवन की ज़िम्मेदारी के साथ-साथ राष्ट्रवाद से जुड़े हैं नेपाल के संस्कृति मंत्री ने माना है कि पशुपतिनाथ मंदिर में प्रमुख पुजारी के रूप में स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति में कुछ प्रक्रियागत ग़लतियाँ रही हैं लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि वे दक्षिण भारतीय पुजारियों की दोबारा नियुक्ति नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने त्यागपत्र दे दिया है।
नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति पर प्रतिबंध लगाने के फ़ैसले के बावजूद नेपाल सरकार ने ये नियुक्ति की है। गुरुवार को सरकार ने ब्राह्मण पुजारियों को हटाकर स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति की घोषणा की थी. इसके बाद से ही सरकार के क़दम का विरोध हो रहा है।
दरअसल वर्षों से पशुपतिनाथ मंदिर में प्रमुख पुजारी की भूमिका दक्षिण भारत के ब्राह्मण निभाते हैं, जिन्हें भट्ट कहा जाता है। उनका सहयोग स्थानीय नेपाली पुजारी करते हैं, लेकिन उनका क़द ब्राह्मण पुजारियों से छोटा होता है। पारंपरिक रूप से नेपाल नरेश ही देश के सर्वोच्च पुजारी की नियुक्ति करते थे लेकिन राजशाही की समाप्ति के बाद माओवादियों के नेतृत्व में बनी सरकार स्थानीय पुजारियों को इस सम्मानित पद पर नियुक्त करना चाहती है। नेपाल में अभी नया संविधान नहीं लिखा गया है, इसलिए इस मामले पर अभी क़ानून स्पष्ट नहीं है कि किसे पुजारियों की नियुक्ति का अधिकार है। नेपाल के संस्कृति मंत्री गोपाल किराती का कहना है कि सरकार स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति के अपने फ़ैसले पर क़ायम है। गुरुवार को सरकार के फ़ैसले के बाद से ही अन्य पुजारियों ने मंदिर के धार्मिक समारोहों से अपने को अलग कर लिया है। मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस और अन्य हिंदू संगठन भी सरकार के इस फ़ैसले का विरोध कर रहे हैं. पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव का मंदिर है और नेपाल के अलावा भारत में भी यह मंदिर काफ़ी मशहूर है। दूसरी ओर पशुपतिनाथ मंदिर के पुजारी सरकार के इस फ़ैसले को धार्मिक मामलो में राजनीतिक हस्तक्षेप बता रहे हैं. पूर्व नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने भी इस विवाद के हल की अपील की है।
ज्ञानेंद्र के सहयोगी पन्हीराज पाठक ने बताया, "ज्ञानेंद्र ने नेपाल सरकार, भक्तों और अन्य लोगों से अपील की है कि वे पशुपतिनाथ मंदिर को राजनीति से ऊपर रखें. उन्होंने कहा है कि आस्था, परंपरा और धार्मिक आचरण हमारे अधिकार और हमारे जीवन की ज़िम्मेदारी के साथ-साथ राष्ट्रवाद से जुड़े हैं नेपाल के संस्कृति मंत्री ने माना है कि पशुपतिनाथ मंदिर में प्रमुख पुजारी के रूप में स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति में कुछ प्रक्रियागत ग़लतियाँ रही हैं लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि वे दक्षिण भारतीय पुजारियों की दोबारा नियुक्ति नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने त्यागपत्र दे दिया है।
सब कुछ अलग लेकिन फिर भी है जुडवां
मिशिगन। जुड़वा शब्द सुनते ही पहला ख्याल तो यही आता है कि दो इंसान एक ही दिन साथ पैदा हुए होंगे। लेकिन मिशिगन में पैदा हुए जुड़वा बच्चों के साथ तो बिल्कुल उलटा ही हो गया।दोनों के पैदा होने में सिर्फ 26 मिनट का ही फर्क था। लेकिन कुछ मिनट के अंतर ने केवल तारीख ही नहीं, महीना और साल तक में फर्क ला दिया। घटना बीते 31 दिसंबर 2008 की है। जब मिशिगन के रोचेस्टर स्थित क्रिटेनटन अस्पताल में दो जुड़वा बच्चे पैदा हुए। रोचक बात यह थी कि एक बच्चा तारिक ग्रिफिन 12:17 मिनट पर 1 जनवरी 2009 को दुनिया में आया जबकि दूसरेबच्चा टेरेंस उससे ठीक 26 मिनट पहले यानी 31 दिसंबर 2008 को पैदा हुआ। चंद मिनटों के फासले ने दोनों के जन्म प्रमाण पत्र में बड़ा फर्क ला दिया। अलग-अलग वर्ष में पैदा होने वाले इन दोनों बच्चों में कुछ खास बात है। संयोग से तारिक और टेरेंस के पिता सीनियर टेरेंस भी जुड़वा हैं। उनके माता-िपता बस इसी बात से संतुष्ट हैं कि दोनों बच्चे स्वस्थ हैं।
Saturday, January 3, 2009
अनूठे पेंटिंग्स चोर
अमूमन चोर सूने मकान और दुकान का ताला तोड कर वहां से नकदी, आभूशण और खाद्य सामग्री चुराते है लेकिन राजस्थान राज्य के राजसमन्द जिले के नाथद्वारा कस्बे में चोरों ने शनिवार रात को एक दुकान का ताला तोड कर वहां से नकदी और अन्य सामान यथावत रहने दिया जबकि वहां रखी पेंटिंग चुरा कर ले गए।
नाथद्वारा नगर के श्रीजी माकेट स्थित नरेन्द्र शर्मा की पिछवई पेंटिंग की दुकान के ताले तोड कर चोरों ने यहां रखी करीब डेढ लाख रुपए मूल्य की पेंटिंग चुरा ली। रविवार सुबह जब नरेन्द्र का पुत्र दुकान खोलने पहुंचा तो उसके होश उड गए। नरेन्द्र शर्मा के अनुसार उक्त पेंटिंग्स उसने 25 हजार रुपए की सोने की बरक से बनाई थी।
नाथद्वारा नगर के श्रीजी माकेट स्थित नरेन्द्र शर्मा की पिछवई पेंटिंग की दुकान के ताले तोड कर चोरों ने यहां रखी करीब डेढ लाख रुपए मूल्य की पेंटिंग चुरा ली। रविवार सुबह जब नरेन्द्र का पुत्र दुकान खोलने पहुंचा तो उसके होश उड गए। नरेन्द्र शर्मा के अनुसार उक्त पेंटिंग्स उसने 25 हजार रुपए की सोने की बरक से बनाई थी।
जमीन से मूर्ति निकालने वाले संत रामदास फरार
राजस्थान राज्य के राजसमन्द जिले के कुम्भलगढ उपखण्ड के कालिंजर गांव से मूर्ति निकालने का दावा करने वाले संत शनिवार को पुलिस पहुंचने से पहले नदारद हो गए। घटना के दूसरे दिन ग्रामीण इस कथित चमत्कार की हकीकत जान चुके थे। पुलिस ने मूर्ति व मौका देख कर ग्रामीणों से पूछताछ की। संत का पता नहीं चल पाया। ज्ञात रहे कि गुरुवार की रात जबलपुर से आए संत रामदास ने गांव के पुराने मकान में चार फीट गहराई तक खड्डा खुदवाया था। पूजा-पाठ के उपरांत यहां ब्रह्मा की मूर्ति निकालने का दावा किया। कई ग्रामीण श्रद्धावश इसे संत का चमत्कार मानने लगे तो कुछ लोगों को संदेह भी हुआ। समाचार आज तक में इस घटनाक्रम को देख कर पुलिस अधीक्षक संतोश चालके ने कुम्भलगढ पुलिस को कालिंजर गांव भेजा लेकिन तब तक संत रामदास नदारद हो गया। इधर ग्रामीणों ने बताया कि संत ने ग्रामीणों से 11 हजार रुपए का चंदा भी मांगा लेकिन ग्रामीण जोड-तोड कर एक हजार रुपए का चंदा दे पाए।
पशुपति नाथ मंदिर का राजनीतिकरण नहीं करे
नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र ने शनिवार को लोगों से पशुपतिनाथ मंदिर विवाद का राजनीतिकरण नहीं करने की अपील की। उन्होंने मंदिर से जुड़े ताजा विवाद पर चिंता जताई है और लोगों से धार्मिक सद्भाव बरकरार रखने को कहा है। माओवादियों द्वारा नेपाल के सबसे पवित्र मंदिर पशुपतिनाथ में जबरदस्ती प्रवेश करने पर विरोध लंबा खिंचने की आशंका है, क्योंकि शीर्ष न्यायालय के एक आदेश को लागू करने के लिए प्रचंड के नेतृत्व वाली सरकार पर दबाव डालने के मकसद से एक संघर्ष समिति का गठन कर लिया गया है।पूर्व गुरिल्लाओं ने नेपाल के उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करते हुए बृहस्पतिवार को पशुपतिनाथ मंदिर में जबरदस्ती प्रवेश किया था। शीर्ष अदालत ने मंदिर की 300 साल पुरानी परंपरा के अनुसार नियुक्त किए गए भारतीय ब्राह्मणों की जगह नेपाली पुजारियों को नियुक्त करने पर रोक लगा दी थी।माओवादी एवं यंग कम्युनिस्ट लीग के कार्यकताओं ने बृहस्पतिवार को मंदिर में जबरदस्ती प्रवेश किया और भारतीय ब्राह्मणों की जगह नए पुजारी को वहां रखवाया। इस कदम का मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांगेस और हिन्दू संगठनों तथा मंदिर के आसपास रहने वाले लोगों ने तुरंत विरोध किया।
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