पाकिस्तान ने मुंबई हमले के संबन्ध में भारत द्वारा सोमवार को पेश किए गए सबूतों को पुराने अंदाज में अपर्याप्त बताते हुए खारिज कर दिया और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए उल्टे भारत के खिलाफ सबूतों का पुलंदा तैयार कर इसे दुनिया भर में बांटने की योजना बना ली है।पाकिस्तान ने सोमवार को दिए गए सबूतों को अपर्याप्त करार देते हुए कहा है कि इनके आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है। भारतीय विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायुक्त शाहिद मलिक और इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त सत्य पाल ने पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर को मुंबई हमलों पाकिस्तानी तत्वों की संलिप्तता को उजागर करने वाले सबूत सौंपे हैं।समाचार पत्र द नेशन ने पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से मंगलवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस्लामाबाद आए अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री रिचर्ड बाउचर से सोमवार को हुई बातचीत में भी अपना यह पक्ष रख दिया है।सूत्रों के अनुसार भारत द्वारा उपलब्ध कराए गे प्रमाण मुंबई में गिरफ्तार आतंकवादी अजमल आमिर कसाब के इकबालिया बयान और हमले के दौरान टेलीफोन पर की गई बातचीत के एक टेप, हथियार एवं अन्य सामग्रियों की बरामदगी पर आधारित हैं।सूत्रों ने बताया कि श्री बाउचर से स्पष्ट शब्दों मे कहा गया है कि पाकिस्तान के समक्ष लाए गए सबूत इतने अपर्याप्त हैं कि उनके आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। इसके अलावा कसाब का बयान भारतीय जांच एजेंसियों की प्रताडना और दबाववश जबरन दिलवाया गया हो सकता है। इसलिए इसका कानूनी महत्व नगण्य है।सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान भारत सरकार को एक दो दिन में अपना जवाब आधिकारिक तौर पर भेज देगा।इस बीच एक टीवी चैनल की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान ने अपने आधिकारिक बयान में भारतीय सबूतों के अध्ययन के लिए एक कमेटी गठित किए जाने की घोषणा की है। लेकिन विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने अखबार से बातचीत में कहा कि भारतीय दस्तावेजों में वही सब बातें कही गई हैं जो भारत के मीडिया में पहले से ही प्रचारित हो रही हैं। इसमें नया कुछ भी नहीं है।अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान ने भी उसके कबायली इलाकों और बलूचिस्तान में हुईं आतंकवादी घटनाओं में भारत की भूमिका को लेकर एक दस्तावेज तैयार किया है इसमें काबुल स्थित भारतीय उच्चायोग की भूमिका का ब्यौरा शामिल है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जल्द ही इस दस्तावेज को अमेरिका एवं अन्य प्रमुख देशों को सौंपेगा और उन्हें बताएगा कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए वास्तव में कौन सा देश जिम्मेदार है और अपने पड़ोसी देशों में आतंकवाद का समर्थन कर रहा है।अधिकारी ने भारत द्वारा वांछित आतंकवादी उसे सौंपे जाने की संभावना से एक बार फिर साफ इनकार किया।
Tuesday, January 6, 2009
महापुरूषों को उसने माफिया बना दिया
कैसी विडम्बना है कि जिन महापुरूषों को भारत के नागरिक महान मानते हुए उन्हें पूजते आए है उसी भारत का एक मंत्री इन महापुरूषों को माफिया बताने से भी नहीं चुक रहा है। उत्तर प्रदेश के एक और कैबिनेट मंत्री ने सरकार की किरकिरी करा दी है। मायावती सरकार के मंत्री अवधपाल सिंह ने महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, लाल बहादुर शास्त्री, चौधरी चरण सिंह आदि को माफिया बताया है। उनकी नजर में डीपी यादव एक बहादुर व्यक्ति हैं।इतना ही नहीं मुकदमों का दर्ज होना शायद माया सरकार के इस मंत्री की नजर में एक सम्मान है। डीपी यादव पर मुकदमों पर उठे एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह तुलना कर डाली थी।गौरतलब है कि अवधपाल सिंह का इतिहास बड़ा दागदार है। ये शराब माफिया हैं। इन पर हत्या, लूट के प्रयास और बलात्कार के 24 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। ये कच्ची शराब का धंधा भी करते हैं। इतना ही नहीं अभी पंद्रह दिन पहले इनके गांव से तीन लाख लीटर अवैध शराब भी पकड़ी गई है। इनके पिता लटरी सिंह यादव डकैत छविराम गैंग के सदस्य थे और उन पर भी 40 से ज्यादा मुकदमें दर्ज थे। वे भी पांच बार विधायक रहे हैं।
बिगडती अमरीकी अर्थव्यवस्था को बराक देंगे नया पैकेज
अमरीका के राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित बराक ओबामा ने अमरीका की अर्थव्यवस्था को बहुत गंभीर बताते हुए कहा है कि हालात और बिगड़ते जा रहे हैं
उन्होंने उम्मीद जताई कि अमरीका में नौकरियों के इस सप्ताह के अंत में आने वाले ताज़ा आँकड़ों में कुछ सुधार होगा।
इससे पहले उन्होंने वाशिंगटन में राजनीतिक नेताओं से देश की अर्थव्यवस्था सुधारने और नई नौकरियाँ पैदा करने के उपायों के बारे में बात की।
अमरीका के मीडिया की रिपोर्टों का कहना है कि ओबामा 800 अरब डॉलर से ज़्यादा के एक बड़े राहत पैकेज की योजना बना रहे हैं जिसमें टैक्सों में 300 अरब डॉलर की कमी भी शामिल है।
ओबामा ने कहा कि वे ऐसी योजना बनाना चाहते हैं जिससे 2011 तक 30 लाख नई नौकरियाँ पैदा हों । नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि वे 20 जनवरी को अपने पद ग्रहण के बाद एक राहत पैकेज जल्दी ही लागू करवाएंगे।
उन्होंने कहा, "अर्थव्यवस्था वाकई बेहद खराब स्थिति में है। हमें इस पर कार्रवाई करनी होगी। यह कार्रवाई हमें तुरंत करनी होगी ताकि इस मंदी की गति पर कुछ रोक लगे।"
उनका कहना था, "हमारे सामने अर्थव्यवस्था के रूप में एक बड़ी और असाधारण चुनौती है और हम इस सप्ताह के अंत में नौकरियों की रिपोर्ट में सुधार की उम्मीद करते हैं।"
अमरीका का श्रम विभाग शुक्रवार को दिसंबर की रोज़ग़ार रिपोर्ट जारी करेगा।
जानकारों को उम्मीद है कि बेरोज़गारों की संख्या पाँच लाख तक बढ़ सकती है जिससे 2008 में अमरीका में नौकरियों का कुल नुकसान 25 लाख हो जाएगा।
ओबामा ने कहा, "राजनीतिक परिदृश्य के अर्थशास्त्री मानते हैं कि अगर हमने दृढ़ता और तेज़ी से कार्रवाई नहीं की तो हम अर्थव्यवस्था को और भी नीचे जाते देखेंगे। इससे बेरोज़ग़ारी दोगुनी हो सकती है और अमरीका के सपने इतने दूर हो सकते हैं जहाँ तक हमारी पहुँच न हो।" इस पैकेज में साल में दो लाख डॉलर से कम कमाने वाले लोगों के लिए टैक्स में छूट और ज्यादा लोगों को भर्ती करने वाली कंपनियों के लिए टेक्स क्रेडिट शामिल है।
ज़्यादातर कामग़ारों के लिए 500 डॉलर और दंपत्ति के लिए एक हज़ार की टैक्स कटौती के अलावा इस पैकेज में व्यापार के लिए सौ अरब डॉलर की टैक्स रियायतें शामिल हैं।
इसमें पिछले साल नुकसान झेल चुकी कंपनियों को पिछले पाँच साल में हुए मुनाफ़े को देखते हुए ऋण दिए जाने की भी योजना है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि अमरीका में नौकरियों के इस सप्ताह के अंत में आने वाले ताज़ा आँकड़ों में कुछ सुधार होगा।
इससे पहले उन्होंने वाशिंगटन में राजनीतिक नेताओं से देश की अर्थव्यवस्था सुधारने और नई नौकरियाँ पैदा करने के उपायों के बारे में बात की।
अमरीका के मीडिया की रिपोर्टों का कहना है कि ओबामा 800 अरब डॉलर से ज़्यादा के एक बड़े राहत पैकेज की योजना बना रहे हैं जिसमें टैक्सों में 300 अरब डॉलर की कमी भी शामिल है।
ओबामा ने कहा कि वे ऐसी योजना बनाना चाहते हैं जिससे 2011 तक 30 लाख नई नौकरियाँ पैदा हों । नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि वे 20 जनवरी को अपने पद ग्रहण के बाद एक राहत पैकेज जल्दी ही लागू करवाएंगे।
उन्होंने कहा, "अर्थव्यवस्था वाकई बेहद खराब स्थिति में है। हमें इस पर कार्रवाई करनी होगी। यह कार्रवाई हमें तुरंत करनी होगी ताकि इस मंदी की गति पर कुछ रोक लगे।"
उनका कहना था, "हमारे सामने अर्थव्यवस्था के रूप में एक बड़ी और असाधारण चुनौती है और हम इस सप्ताह के अंत में नौकरियों की रिपोर्ट में सुधार की उम्मीद करते हैं।"
अमरीका का श्रम विभाग शुक्रवार को दिसंबर की रोज़ग़ार रिपोर्ट जारी करेगा।
जानकारों को उम्मीद है कि बेरोज़गारों की संख्या पाँच लाख तक बढ़ सकती है जिससे 2008 में अमरीका में नौकरियों का कुल नुकसान 25 लाख हो जाएगा।
ओबामा ने कहा, "राजनीतिक परिदृश्य के अर्थशास्त्री मानते हैं कि अगर हमने दृढ़ता और तेज़ी से कार्रवाई नहीं की तो हम अर्थव्यवस्था को और भी नीचे जाते देखेंगे। इससे बेरोज़ग़ारी दोगुनी हो सकती है और अमरीका के सपने इतने दूर हो सकते हैं जहाँ तक हमारी पहुँच न हो।" इस पैकेज में साल में दो लाख डॉलर से कम कमाने वाले लोगों के लिए टैक्स में छूट और ज्यादा लोगों को भर्ती करने वाली कंपनियों के लिए टेक्स क्रेडिट शामिल है।
ज़्यादातर कामग़ारों के लिए 500 डॉलर और दंपत्ति के लिए एक हज़ार की टैक्स कटौती के अलावा इस पैकेज में व्यापार के लिए सौ अरब डॉलर की टैक्स रियायतें शामिल हैं।
इसमें पिछले साल नुकसान झेल चुकी कंपनियों को पिछले पाँच साल में हुए मुनाफ़े को देखते हुए ऋण दिए जाने की भी योजना है।
Sunday, January 4, 2009
लालू प्रसाद चले जापान
जब से लालू प्रसाद यादव ने रेलवे में मुनाफा बढाना क्या शुरू कर दिया है उन्हें सभी लोग मेनेजमेंट गुरु के रूप में पूजने लगे है। अब देखो लम्बी-चौडी पढाई करने वाले मेनेजमेंट गुरुओ का जमाना नहीं रहा अब लालू ही मेनेजमेंट के फण्डे सिखाएंगे वह भी जापना के छात्रों को रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव अब भारतीय रेल के कायाकल्प के बारे में जापानी स्टूडंट्स को भी मैनिजमंट मंत्र से रू-ब-रू कराएंगे। इससे पहले वह अहमदाबाद में मौजूद इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनिजमंट और और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडंट्स को प्रबंधन के गुर सीखा चुके हैं। रेल मंत्री के निकट सहयोगी व राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता श्याम रजक ने बताया कि लालू जापान सरकार के निमंत्रण पर 11 जनवरी को 10 दिवसीय यात्रा पर रवाना होंगे। वहां की रेल व्यवस्था का अध्ययन करने के अलावा लालू तोक्यो सहित कई यूनिवर्सिटी में इंडियन रेल के कायाकल्प के बारे में लेक्चर भी देंगे। रजक ने कहा कि संकट के दौर से गुजर रहे भारतीय रेलवे को लालू ने उबारा और वर्तमान वित्त वर्ष में उन्होंने एक लाख करोड़ मुनाफे का आश्वासन दिया है।
दुश्मनों के दांत खट्टे करने के लिए किजिए ऑन लाइन गांधीगिरी
शहर में अपराधियों के आज़ाद घूमने पर आपको किसी मंत्री के खिलाफ गुस्सा जाहिर
करना हो या तेज़ आवाज़ में म्यूजिक बजाने वाले पड़ोसी का विरोध करना हो, अब आप इन्हें ग्रीटिंग्स कार्ड के जरिए अलग अंदाज में शर्मसार कर सकते हैं। आपकी इस मुश्किल को आसान कर दिया है www.papam.in ने। इसके ज़रिए व्यंग्यपूर्ण और अहिंसक तरीके से विरोध प्रदर्शन कर अपने विरोधी को शर्मसार करने के लिए आप उसे कार्ड भेज सकते हैं। www.papam.in के डायरेक्टर ने कहा, ' हमारी साइट पर कार्ड संबंधित लोगों के व्यक्तिगत, स्थानीय और राष्ट्रीय हितों से जुड़ीं चिंता के मुद्दे पर उनके दर्द को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं। शुरुआती तौर पर इस सीरीज़ में कुल 14 आम मुद्दों को शामिल किया गया है। मनीष पाठक ने काह, ' इस सीरीज़ को नए कारणों और चिंताओं के साथ अपडेट किया जाता रहेगा। इस पहल से लोग उग्र प्रदर्शन और हिंसा किए बिना सामाजिक मुद्दों पर अभियान भी चला सकेंगे। ' गांधीगीरी कार्ड्स को ऑनलाइन चुना जा सकता है और फिर वग कुरियर के जरिये संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाए जाएंगे। मनीष पाठक के मुताबिक, अधिकारी या मंत्री के लिए जहां उसके खिलाफ उग्र प्रदर्शन टालना आसान होगा, लेकिन डाक के ज़रिए मिले ग्रीटिंग कार्ड को अस्वीकार करना बेहद मुश्किल होगा।
करना हो या तेज़ आवाज़ में म्यूजिक बजाने वाले पड़ोसी का विरोध करना हो, अब आप इन्हें ग्रीटिंग्स कार्ड के जरिए अलग अंदाज में शर्मसार कर सकते हैं। आपकी इस मुश्किल को आसान कर दिया है www.papam.in ने। इसके ज़रिए व्यंग्यपूर्ण और अहिंसक तरीके से विरोध प्रदर्शन कर अपने विरोधी को शर्मसार करने के लिए आप उसे कार्ड भेज सकते हैं। www.papam.in के डायरेक्टर ने कहा, ' हमारी साइट पर कार्ड संबंधित लोगों के व्यक्तिगत, स्थानीय और राष्ट्रीय हितों से जुड़ीं चिंता के मुद्दे पर उनके दर्द को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं। शुरुआती तौर पर इस सीरीज़ में कुल 14 आम मुद्दों को शामिल किया गया है। मनीष पाठक ने काह, ' इस सीरीज़ को नए कारणों और चिंताओं के साथ अपडेट किया जाता रहेगा। इस पहल से लोग उग्र प्रदर्शन और हिंसा किए बिना सामाजिक मुद्दों पर अभियान भी चला सकेंगे। ' गांधीगीरी कार्ड्स को ऑनलाइन चुना जा सकता है और फिर वग कुरियर के जरिये संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाए जाएंगे। मनीष पाठक के मुताबिक, अधिकारी या मंत्री के लिए जहां उसके खिलाफ उग्र प्रदर्शन टालना आसान होगा, लेकिन डाक के ज़रिए मिले ग्रीटिंग कार्ड को अस्वीकार करना बेहद मुश्किल होगा।
नेपाल सरकार स्थानीय पुजारियों को ही नियुक्त करेगी
काठमांडू स्थित मशहूर पशुपतिनाथ मंदिर में स्थानीय नेपाली पुजारियों को नियुक्त करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है और इसका विरोध भी बढ़ रहा है। लेकिन नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि पशुपतिनाथ मंदिर में नेपाली पुजारियों को नियुक्त करने के फ़ैसले पर वह क़ायम है। भारत में मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना ने भी नेपाल सरकार के इस फ़ैसले का विरोध किया है। भारत में इसके विरोध में प्रदर्शन भी हो रहे हैं.
नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति पर प्रतिबंध लगाने के फ़ैसले के बावजूद नेपाल सरकार ने ये नियुक्ति की है। गुरुवार को सरकार ने ब्राह्मण पुजारियों को हटाकर स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति की घोषणा की थी. इसके बाद से ही सरकार के क़दम का विरोध हो रहा है।
दरअसल वर्षों से पशुपतिनाथ मंदिर में प्रमुख पुजारी की भूमिका दक्षिण भारत के ब्राह्मण निभाते हैं, जिन्हें भट्ट कहा जाता है। उनका सहयोग स्थानीय नेपाली पुजारी करते हैं, लेकिन उनका क़द ब्राह्मण पुजारियों से छोटा होता है। पारंपरिक रूप से नेपाल नरेश ही देश के सर्वोच्च पुजारी की नियुक्ति करते थे लेकिन राजशाही की समाप्ति के बाद माओवादियों के नेतृत्व में बनी सरकार स्थानीय पुजारियों को इस सम्मानित पद पर नियुक्त करना चाहती है। नेपाल में अभी नया संविधान नहीं लिखा गया है, इसलिए इस मामले पर अभी क़ानून स्पष्ट नहीं है कि किसे पुजारियों की नियुक्ति का अधिकार है। नेपाल के संस्कृति मंत्री गोपाल किराती का कहना है कि सरकार स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति के अपने फ़ैसले पर क़ायम है। गुरुवार को सरकार के फ़ैसले के बाद से ही अन्य पुजारियों ने मंदिर के धार्मिक समारोहों से अपने को अलग कर लिया है। मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस और अन्य हिंदू संगठन भी सरकार के इस फ़ैसले का विरोध कर रहे हैं. पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव का मंदिर है और नेपाल के अलावा भारत में भी यह मंदिर काफ़ी मशहूर है। दूसरी ओर पशुपतिनाथ मंदिर के पुजारी सरकार के इस फ़ैसले को धार्मिक मामलो में राजनीतिक हस्तक्षेप बता रहे हैं. पूर्व नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने भी इस विवाद के हल की अपील की है।
ज्ञानेंद्र के सहयोगी पन्हीराज पाठक ने बताया, "ज्ञानेंद्र ने नेपाल सरकार, भक्तों और अन्य लोगों से अपील की है कि वे पशुपतिनाथ मंदिर को राजनीति से ऊपर रखें. उन्होंने कहा है कि आस्था, परंपरा और धार्मिक आचरण हमारे अधिकार और हमारे जीवन की ज़िम्मेदारी के साथ-साथ राष्ट्रवाद से जुड़े हैं नेपाल के संस्कृति मंत्री ने माना है कि पशुपतिनाथ मंदिर में प्रमुख पुजारी के रूप में स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति में कुछ प्रक्रियागत ग़लतियाँ रही हैं लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि वे दक्षिण भारतीय पुजारियों की दोबारा नियुक्ति नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने त्यागपत्र दे दिया है।
नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति पर प्रतिबंध लगाने के फ़ैसले के बावजूद नेपाल सरकार ने ये नियुक्ति की है। गुरुवार को सरकार ने ब्राह्मण पुजारियों को हटाकर स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति की घोषणा की थी. इसके बाद से ही सरकार के क़दम का विरोध हो रहा है।
दरअसल वर्षों से पशुपतिनाथ मंदिर में प्रमुख पुजारी की भूमिका दक्षिण भारत के ब्राह्मण निभाते हैं, जिन्हें भट्ट कहा जाता है। उनका सहयोग स्थानीय नेपाली पुजारी करते हैं, लेकिन उनका क़द ब्राह्मण पुजारियों से छोटा होता है। पारंपरिक रूप से नेपाल नरेश ही देश के सर्वोच्च पुजारी की नियुक्ति करते थे लेकिन राजशाही की समाप्ति के बाद माओवादियों के नेतृत्व में बनी सरकार स्थानीय पुजारियों को इस सम्मानित पद पर नियुक्त करना चाहती है। नेपाल में अभी नया संविधान नहीं लिखा गया है, इसलिए इस मामले पर अभी क़ानून स्पष्ट नहीं है कि किसे पुजारियों की नियुक्ति का अधिकार है। नेपाल के संस्कृति मंत्री गोपाल किराती का कहना है कि सरकार स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति के अपने फ़ैसले पर क़ायम है। गुरुवार को सरकार के फ़ैसले के बाद से ही अन्य पुजारियों ने मंदिर के धार्मिक समारोहों से अपने को अलग कर लिया है। मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस और अन्य हिंदू संगठन भी सरकार के इस फ़ैसले का विरोध कर रहे हैं. पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव का मंदिर है और नेपाल के अलावा भारत में भी यह मंदिर काफ़ी मशहूर है। दूसरी ओर पशुपतिनाथ मंदिर के पुजारी सरकार के इस फ़ैसले को धार्मिक मामलो में राजनीतिक हस्तक्षेप बता रहे हैं. पूर्व नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने भी इस विवाद के हल की अपील की है।
ज्ञानेंद्र के सहयोगी पन्हीराज पाठक ने बताया, "ज्ञानेंद्र ने नेपाल सरकार, भक्तों और अन्य लोगों से अपील की है कि वे पशुपतिनाथ मंदिर को राजनीति से ऊपर रखें. उन्होंने कहा है कि आस्था, परंपरा और धार्मिक आचरण हमारे अधिकार और हमारे जीवन की ज़िम्मेदारी के साथ-साथ राष्ट्रवाद से जुड़े हैं नेपाल के संस्कृति मंत्री ने माना है कि पशुपतिनाथ मंदिर में प्रमुख पुजारी के रूप में स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति में कुछ प्रक्रियागत ग़लतियाँ रही हैं लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि वे दक्षिण भारतीय पुजारियों की दोबारा नियुक्ति नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने त्यागपत्र दे दिया है।
सब कुछ अलग लेकिन फिर भी है जुडवां
मिशिगन। जुड़वा शब्द सुनते ही पहला ख्याल तो यही आता है कि दो इंसान एक ही दिन साथ पैदा हुए होंगे। लेकिन मिशिगन में पैदा हुए जुड़वा बच्चों के साथ तो बिल्कुल उलटा ही हो गया।दोनों के पैदा होने में सिर्फ 26 मिनट का ही फर्क था। लेकिन कुछ मिनट के अंतर ने केवल तारीख ही नहीं, महीना और साल तक में फर्क ला दिया। घटना बीते 31 दिसंबर 2008 की है। जब मिशिगन के रोचेस्टर स्थित क्रिटेनटन अस्पताल में दो जुड़वा बच्चे पैदा हुए। रोचक बात यह थी कि एक बच्चा तारिक ग्रिफिन 12:17 मिनट पर 1 जनवरी 2009 को दुनिया में आया जबकि दूसरेबच्चा टेरेंस उससे ठीक 26 मिनट पहले यानी 31 दिसंबर 2008 को पैदा हुआ। चंद मिनटों के फासले ने दोनों के जन्म प्रमाण पत्र में बड़ा फर्क ला दिया। अलग-अलग वर्ष में पैदा होने वाले इन दोनों बच्चों में कुछ खास बात है। संयोग से तारिक और टेरेंस के पिता सीनियर टेरेंस भी जुड़वा हैं। उनके माता-िपता बस इसी बात से संतुष्ट हैं कि दोनों बच्चे स्वस्थ हैं।
Subscribe to:
Posts (Atom)