Friday, April 10, 2009

गुलशन ग्रोवर को हरफनमौला टेपा की उपाधि

अंतरराष्ट्रीय मूर्ख दिवस पर उज्जैन में आयोजित कालिदास अकादमी के मुक्ताकाशी रंगमंच पर 39वें 'टेपा सम्मेलन' का आयोजन किया गया। इसमें आमंत्रित मशहूर हस्तियों पर प्रशस्ति वाचन करते हुए उन्हें विभिन्न उपाधियां दी गईं। संस्थापक अध्यक्ष डॉ. शिव शर्मा ने टेपा रिपोर्ट में कहा कि आज सबसे बड़ा राष्ट्रीय संकट है कि देश का पीएम कौन बनेगा। इसलिए हम टेपा पीएम की घोषणा कर रहे हैं जिसमें सभी पीएम होंगे। घोषणा पत्र जारी करते हुए डॉ. शर्मा ने मांग की कि हमारा एक अलग 'टेपुस्तान' होगा जिसकी राजधानी उज्जैन होगी। राष्ट्रीय पशु वैशाखनंदन तथा राष्ट्र पक्षी उल्लू होगा। अभिनेता गुलशन ग्रोवर पर प्रशस्तिवाचन करते हुए उन्हें 'बैड मैन' के नाम से मशहूर गुड मैन बताते हुए हरफनमौला टेपा की उपाधि प्रदान की गई।

आर्थिक मंदी में सेक्स क्लिनिक कारोबार में इजाफा

मंदी और अन्य बाजारों की उठापटक से बेपरवाह सेक्स क्लिनिकों और जवानी 'लौटाने' वाले नीम हकीमों का कारोबार बदस्तूर जारी है। न तो उनके विज्ञापनों में कमी आई है और न ही मरीजों की संख्या में। दिलचस्प बात यह भी देखने में आ रही है कि आर्थिक मंदी ने एक मायने में उनका कारोबार बढ़ाने का काम किया है। इस कारोबार पर मंदी का निगटिव असर नहीं हुआ है। आर्थिक मंदी और जॉब कट जैसी गतिविधियों के बीच सेक्स समस्याओं से जूझ रहे लोगों की तादाद में इजाफा ही देखने को मिला है। इन डॉक्टरों के मुताबिक ज्यादा समय तक बेरोजगार रहने, वित्तीय चिंताओं और लंबे समय तक काम करने से टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन का स्तर गिर जाता है। अंडकोषों द्वारा उत्सर्जित टेस्टोस्टेरॉन हामोर्न पुरुषों में यौन क्षमता को बढ़ाने में सहायक होता है। इसका संबंध यौन क्रिया, ब्लड सर्कुलेशन, मांसपेशियों की मजबूती के साथ ही एकाग्रता, मूड और मेमॉरी से भी होता है। डॉक्टर्स के मुताबिक हमने न तो अपनी फीस कम की है, न दवाओं के दाम ही घटाए हैं। आयुर्वेदिक दवाओं के दुकानदार भी कारोबार पर मंदी का बात खारिज करते हैं। उनके मुताबिक स्वर्णभस्म की 1 ग्राम की पुडि़या अब भी 3,000 रुपए की दर से बिक रही है। चांदी भस्म 200 से 250 रुपए प्रति 2.5 ग्राम के स्तर पर है। यही हाल मूंगा स्टोन, लौह बंग और परवाल की भी है। इनकी कीमतें अगर चढ़ी नहीं हैं तो इनमें गिरावट भी नहीं आई है। झोला छाप नीम हकीमों की भी चल निकली है। पुरानी दिल्ली इनका अड्डा माना जाता है। रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों पर भी इनकी अच्छीखासी तादाद होती है। इन हकीमों के पास जाने वालों में गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों की तादात ज्यादा होती है। इनकी दवाइयों सस्ती होती है, लेकिन सीधेसादे ग्राहकों को वे अच्छी तरह चूना लगाते हैं। जानकारों का कहना है कि इन नीम हकीमों का न तो तरीका वैज्ञानिक होता है और न ही उनकी दवाइयों के असर की कोई प्रमाणिकता होती है। लेकिन अशिक्षित या गरीब लोगों को ये ही सुलभ लगते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक उनके यहां आने वाले मरीजों में सबसे ज्यादा तादाद शीघ्र पतन या प्री-मैच्योर इजैकुलेशन की शिकायत होती है। इम्पोटंसी और अन्य कमजोरियों वाले मरीज भी अधिक संख्या में आते हैं। उनका यह भी कहना है कि ज्यादातर मामलों में समस्या फिजिकल न होकर साइकोलॉजिकल होती है। भाग-दौड़ भरी जिंदगी और तनाव से भी सेक्स लाइफ पर असर पड़ता है। इन चीजों का इलाज कोई विशेषज्ञ ही कर सकता है। ऐसे लोग अगर नीम हकीमों के चक्कर में पड़ जाएं तो वे लूट लेंगे।

Thursday, April 9, 2009

स्टूडंट के साथ सेक्स के आरोप में 10 महीने की जेल

सिंगापुर की एक 32 साल की महिला को 13 साल के स्कूल स्टूडंट के साथ सेक्स करने के आरोप में 10 महीने के लिए जेल की सजा मिली है। यह महिला तलाकशुदा है और उन्हें 14 महीने का एक बच्चा भी है। पहले तो वह महिला बॉयज़ स्कूल के कैंटीन स्टॉल असिसटंट का काम करती थी, पर फिलहाल वह बेरोजगार है। रिपोर्ट की मानें तो इस घटना का पता तब चला जब उस महिला की बहन उसके फ्लैट पर आई और उसने देखा कि वह बच्चा वॉरड्रोब में छिपा हुआ था। उस महिला का बड़ा भाई बाद में जब वहां पहुंचा तो यह सोचकर उन्होंने पुलिस को फोन किया कि शायद वह बच्चा कोई चोर है। इन दोनों के बीच रिलेशनशिप की शुरुआत तब हुई, जब लड़के की मां उस महिला के बच्चे की देखभाल के लिए उनके घर आया करती थीं। इस बच्चे की पहचान को छिपाने के लिए महिला का नाम गुप्त रखा गया है और संभव है कि उसने जो अपराध किया है उसके लिए उसे 10 साल तक की भी सजा मिले। उस महिला की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार जब यह घटना घटी तो वह भयंकर डिप्रेशन से गुजर रही थी। यहां तक कि उसने डॉक्टर से भी कहा कि इसमें दोनों समान रूप से अपनी मर्जी से शामिल हैं। हालांकि जज के अनुसार उस बच्चे तक पहुंचने के लिए महिला ने ही अपनी ओर से कोशिश की और उम्र में बड़े होने के नाते उन्हें पता होना चाहिए था कि वह जो करने जा रही है, वह गलत है। NBT

कुत्ते के विवाद में पुलिस अधिकारी का कूल्हा काट खाया।

जर्मनी में कुत्ते के विवाद को लेकर एक व्यक्ति द्वारा एक पुलिस अधिकारी का कूल्हा काट खाने की घटना प्रकाश में आई है। समाचार एजंसी डीडीपी के मुताबिक यह घटना पश्चिमी जर्मनी के एकाहेन शहर की है। पुलिस अधिकारी का कूल्हा काटने वाले 24 वर्षीय व्यक्ति ने अपने 'पिट बुल' नस्ल के कुत्ते को खुला छोड़ रखा था। अपने मालिक से खुली छूट मिलने के बाद कुत्ता पड़ोस स्थित एक पार्क में पहुंच गया और वहां खेल रहे बच्चों की फुटबाल के चिथड़े कर दिए। बच्चे इससे डरकर घरों में भाग गए। नाराज लोगों ने पुलिस में इसकी शिकायत की। मामले को निपटाने के लिए स्थानीय पुलिस केंद्र का एक अधिकारी जब घटनास्थल पर पहुंचा तो उसने देखा कि भयभीत लोग अपने बच्चों को लेकर घरों को लौट चुके हैं। दूसरी ओर, कुत्ते का मालिक बिना किसी चिंता के सारा नजारा देखता रहा। पुलिस अधिकारी ने जब उससे कुत्ते को बांधने के लिए कहा तो उसने उससे बहस शुरू कर दी और अकेला पाकर पुलिस अधिकारी का कूल्हा काट खाया। इस घटना के बाद उस व्यक्ति को हिरासत में ले लिया गया और उसके कुत्ते को भी पकड़कर जानवरों के आश्रय स्थल में भेज दिया गया।

हवा में पैदा कर बेसहारा छोडा

न्यू जीलैंड में पिछले महीने एक विमान में बच्चे को जन्म देकर बेसहारा छोड़ने वाली महिला कैरोलिना माइका ने अपना कसूर मान लिया है। समाचार एजंसी डीपीए के अनुसार इस मले में कैरोलिना को दोषी ठहराया गया था लेकिन मनकाऊ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने यह जानने के बाद उसे छोड़ दिया कि वह डिप्रेशन में हैं। जज के सामने सामाओ की नागरिक कैरोलिना ने कहा कि उसने अपने नवजात बच्चे को प्लेन में छोड़ दिया क्योंकि वह बिन ब्याही मां बनी थी, यह उसके परिवार और गांव के लिए बदनामी की वजह बन सकती थी। पुलिस ने उसके खिलाफ लगा बच्चे पर हमले का आरोप वापस ले लिया है। पुलिस ने कहा है कि बच्चे को प्रसव के समय चोटें आईं थीं। फिलहाल महिला आव्रजन अधिकारियों की हिरासत में हैं और बच्चा न्यूजीलैंड के बाल कल्याण विभाग की देखरेख में है।

Wednesday, April 8, 2009

गूगल की चुनावी वेबसाइट पेश

गूगल इंडिया ने भारतीय लोकसभा चुनाव के लिए एक अलग वेबसाइट पेश की है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति मतदाता सूची में अपने नाम की जांच कर सकता है, अपने मतदान केंद्र के बारे में पता लगा सकता है और अपने चुनाव क्षेत्र के नक्शे को खंगाल सकता है। यह हिंदी और अंगेजी दो भाषाओं में उपलब्ध है। इसे प्रमुख गैर सरकारी संगठनों के एक समूह के साथ मिलकर पेश किया गया है। गूगल इंडिया द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि मतदाता इस से चुनाव संबंधी ताजा खबरें, ब्लॉग, वीडियो और उद्धरणों को देख, पढ़ सकते हैं। इस काम में गूगल इंडिया को सहयोग देने वालों में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स, इंडिकस एनालिटिक्स, जनाग्रह सेंटर फॉर सिटिजनशिप एंड डेमोक्रेसी, लिबर्टी इंस्टीट्यूट तथा पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च जैसे गैरसरकारी संगठन शामिल हैं। JOSH 18

धरती पकड़ की राह पर चलते अनिल भारती

धरती पकड़ लोगों को आज भी याद हैं। कुशीनगर जिले में अनिल भारती भी धरती पकड़ की राह पर चल रहे है। प्रधानी के चुनाव से लगातार विधानसभा चुनाव निर्दलीय लड़ते आ रहे हैं। मौजूदा चुनाव में यहां से उनकी उम्मीदवारी चर्चा में है। धरती पकड़ की राह पर चलने वाले ये शख्स हैं 43 वर्षीय अनिल भारती। कुशीनगर जनपद के विकास खंड कप्तानगंज अंतर्गत स्थित ग्राम लखिमा निवासी अनिल भारती ने सर्वप्रथम वर्ष 1994 में हाटा सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से पर्चा दाखिला किया, लेकिन इन्हे महज 2198 वोट प्राप्त हो सका। वर्ष 1998 के चुनाव में भी भारती ने दांव आजमाया लेकिन इस बार भी महज पांच हजार वोट ही मिल सके। तीसरी बार ये वर्ष 2007 के में हाटा विधानसभा क्षेत्र से ही चुनाव लड़े। इस बार इनके मतों का प्रतिशत बढ़ा और उन्हे 12082 वोट हासिल हुए। इसके पूर्व वह वर्ष 2005 में ग्राम प्रधान का चुनाव हार चुके हैं। इसी तरह प्रधान चुनाव के तत्काल बाद हुए जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में इनका क्षेत्र महिला के लिए आरक्षित हो गया तो उन्होंने अपनी पत्‍‌नी को चुनावी समर में उतार दिया फिर भी जीत हासिल नहीं हो सकी। खास बात यह है कि इन चुनावों में मिली पराजय के बावजूद इनके इरादे में कोई फर्क नहीं पड़ा। हर बार कोई भी चुनाव हो चुनावी बिगुल बजते ही भारती अपने सभी जरूरी कार्य स्थगित कर धरती पकड़ की राह पर चलते हुए चुनावी मैदान में कूद जाते है। jagran