आसाराम बापू के आश्रम में दो लड़कों की पिछले साल रहस्यमय तरीके से हुई मौत की जांच कर रहे राज्य सीआईडी (अपराध) ने कहा है कि आश्रम के भीतर काला जादू किया जाता रहा होगा। यह खुलासा आसाराम बापू की गुरुकुल में पढ़ाई कर रहे दीपेश और अभिषेक वाघेला नाम के दो छात्रों की रहस्यमय तरीके से हुई मौत के एक साल बाद किया गया है। गुजरात उच्च न्यायालय में जांच एजेंसी की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि आश्रम के कुछ शिष्य इस बारे में जानते थे और वे इस सूचना को छिपाने की कोशिश कर रहे थे। अदालत में दायर हलफनामे में इस मामले के जांच अधिकारी एच. बी. राजपूत ने कहा कि तीन छात्रों के लाई डिटेक्शन टेस्ट के बाद एजेंसी इस नतीजे पर पहुंची। इन शिष्यों के नाम मिनकेतन पात्र, विकास खेमका और उयर संघानी हैं। जब दोनों छात्रों की रहस्यमय तरीके से मौत हुई तो वे आश्रम में उपस्थित थे। राजपूत ने दोनों मृत लड़कों के पिता की ओर से दाखिल याचिका के जवाब में ये बातें कही हैं। याचिका में लड़कों के पिता ने कहा था कि सीआईडी (अपराध) को दोनों की मौत की वजह के बारे में अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। इसलिए मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जानी चाहिए। इन दोनों लड़कों का शव साबरमती नदी के तट से उनके लापता होने के दो दिन बाद मिला था. मामले की अगली सुनवाई न्यायमूर्ति एच.एन. देवनी 15 जुलाई को करेंगे। सीआईडी :अपराध: ने अब तक दोनों लड़कों की मौत के मामले में किसी व्यक्ति को अभियुक्त के तौर पर नामित नहीं किया है, लेकिन राजपूत ने अपने हलफनामे में सीबीआई जांच की मांग पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सीआईडी मामले में विस्तार से जांच कर रही है।
Saturday, July 4, 2009
अनाथ आश्रम की आड़ में जबरन देह व्यापार
राजस्थान के कोटा में अनाथ आश्रम की आड़ में टीनएजर लड़कियों से जबरन देह व्यापार कराने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इसका खुलासा किया अहमदाबाद के कालुपुर रेलवे स्टेशन पर बदहवास हालत में मिली 12 साल की लड़की ने। वह कोटा से यहां पहुची थी। लड़की ने बताया कि जब वह कोटा में थी तो दो लोगों ने उसके साथ बलात्कार किया। मेडिकल जांच में भी इसकी पुष्टि हो गई है। अहमदाबाद पुलिस ने आश्रम से जुड़े लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर कोटा पुलिस को भेजने की कार्यवाही शुरू कर दी है। कालुपुर रेलवे स्टेशन पर बदहवास हालत में इस लड़की के मिलने के बाद स्टेशन मास्टर ने स्टेशन पर काम करने वाले एक एनजीओ के लोगों को बुला लिया। एनजीओ के लोगों को लड़की ने बताया कि उसके आश्रम में देह व्यापार चल रहा है और वह भी शिकार बन चुकी है। एनजीओ की पहल पर एलिसब्रिज थाने में मामला दर्ज हो गया है। लड़की ने बताया कि करीब 10 दिन पहले उसे रात को अन्य लड़कियों के साथ किसी जगह ले जाया गया। वहां उन सभी को अलग अलग बने कमरों में भेज दिया गया। पीड़िता ने बताया कि वहां उसके साथ दो युवकों ने बलात्कार किया। लड़की ने जब दर्द की शिकायत की तो उसे आश्रम छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया और एक दूर के रिश्तेदार के साथ ट्रेन में बिठाकर अहमदाबाद भेज दिया। कालुपुर स्टेशन पर खाना लाने का बहाना कर वह युवक उसे अकेला छोड़कर यहां से फरार हो गया। लड़की को फिलहाल एनजीओ की देखरेख में रखा गया है और उसके परिजनों की तलाश की जा रही है।
Thursday, July 2, 2009
यह क्या है?
मंगलवार रात को आसमान के दक्षिणी छोर में चांद जैसी चमकती दिखी। कुछ देर बाद अचानक इसने आकृति बदलना शुरू कर दिया। और देखते-देखते औझल हो गई। प्रस्तुत उसकी तस्वीरे
5 साल के बच्चों से पूछ रहे हैं,'तुम आतंकवादी हो?
नई वीजा प्रणाली के तहत ब्रिटेन के स्कूलों में दाखिले की चाह रखने वाले पांच साल के बच्चों से पूछा जा रहा है कि क्या वे आतंकवादी हैं। स्कूलों में दाखिले के आवेदन में रखे गए इस सवाल पर विवाद भी शुरू हो गया है। समाचारपत्र 'टेलीग्राफ' में गुरुवार को छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूलों में दाखिला पाने की चाह रखने वाले बच्चों से ब्रिटेन में ये सवाल पूछे गए कि क्या वे आतंकवादी हैं या किसी युद्ध-अपराध या जनसंहार में शामिल रहे हैं। ये सवाल गृह मंत्रालय की ओर से पिछले महीने लागू किए गए नए नियम-कायदों के बाद पूछे गए हैं। विदेशी छात्रों की ओर से भरे जाने वाले 57 पन्नों के दस्तावेज में पूछा गया है कि आवेदक कभी किसी माध्यम या किसी उद्देश्य से देश में किसी आतंकी वारदात में शामिल रहे, उसका समर्थन किया या उसे बढ़ावा दिया है? इस दस्तावेज में यह भी पूछा गया है आवेदक ने कभी किसी माध्यम या किसी उद्देश्य से किसी आतंकवादी वारदात को सही ठहराया है या किसी आतंकवादी हिंसा का महिमा-मंडन किया है या कोई ऐसा काम किया है जिससे किसी को आतंकवादी वारदात को अंजाम देने की प्रेरणा मिले? शिक्षाविदों ने चेतावनी दी है कि नए नियम से ब्रिटेन में पढ़ रहे करीब 20,000 विदेशी लोगों के देश से बाहर निकाले जाने का खतरा पैदा हो गया है। उदारवादी डेमोक्रैट्स का कहना है कि ताजा विवाद से एक अच्छे वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में ब्रिटेन की छवि को नुकसान पहुंच सकता है। NBT
गर्भवती महिला से गैंग रेप किया
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में दबंगों ने एक गर्भवती महिला के घर में घुसकर उसके साथ गैंग रेप किया। आला पुलिस अधिकारियों के निर्देश के बाद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही थी। जिले के मंसूरपुर क्षेत्र के गांव नरा की एक 32 वर्षीय महिला ने आरोप लगाया है कि गांव के 5 लोगों ने उसके घर में घुसकर उसके साथ गैंग रेप किया। पीड़िता की शिकायत के मुताबिक गांव के कुछ लोगों ने कुछ दिन पहले उसे व उसके पति के पीटा था, जिसकी शिकायत उन्होंने पुलिस से की थी। शिकायत से क्षुब्ध पांच लोग 28 जून की रात उसके घर में घुस गए और सास-ननद को बांधकर बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गए। पीड़िता का आरोप है कि शिकायत के बावजूद मंसूरपुर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद उसने बुधवार को एसपी से कार्रवाई के लिए गुहार लगाई।
'आदमी होकर आदमी से प्यार अपराध नहीं'
दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को दिए अपने एक अहम फैसले में दो व्यस्कों द्वारा आपसी सहमति से बनाए जाने वाले अप्राकृतिक संबंधों को अपराध नहीं माना है। कोर्ट ने कहा कि यदि दोनों की उम्र 18 साल से ऊपर है , तो वे अपनी मर्जी से साथ रह सकते हैं। गौरतलब है कि इस मामले में हाई कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में फैसला सुरक्षित रखा था। आईपीसी की धारा -377 के तहत अप्राकृतिक संबंध बनाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है और दोषी पाए जाने पर उम्रकैद तक हो सकती है।
दिल्ली स्थित नाज फाउंडेशन ने 2001 में हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर इस धारा में संशोधन की मांग की थी। अर्जी में कहा गया था कि दो वयस्कों ( होमो अथवा हेट्रो ) के बीच अगर आपसी सहमति से अप्राकृतिक संबंध बनाए जाते हैं , यानी दो लोग अगर होमो सेक्सुअलिटी में संलिप्त हैं तो उनके खिलाफ धारा -377 का केस नहीं बनना चाहिए। हाई कोर्ट ने इस दलील को सही माना और कहा कि दो व्यस्कों पर किसी तरह की पाबंदी लगाना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।
दिल्ली स्थित नाज फाउंडेशन ने 2001 में हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर इस धारा में संशोधन की मांग की थी। अर्जी में कहा गया था कि दो वयस्कों ( होमो अथवा हेट्रो ) के बीच अगर आपसी सहमति से अप्राकृतिक संबंध बनाए जाते हैं , यानी दो लोग अगर होमो सेक्सुअलिटी में संलिप्त हैं तो उनके खिलाफ धारा -377 का केस नहीं बनना चाहिए। हाई कोर्ट ने इस दलील को सही माना और कहा कि दो व्यस्कों पर किसी तरह की पाबंदी लगाना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।
Tuesday, June 30, 2009
केंद्रीय मंत्री ने बेल के लिए दबाव डाला : हाई कोर्ट जज
मद्रास हाई कोर्ट के जज ने खुली अदालत में यह कह कर सनसनी फैला दी कि फर्जी मार्क्सशीट से जुड़े एक मामले में केंद्रीय मंत्री ने फोन कर के उन पर दबाव डालने की कोशिश की। मंत्री चाहते थे कि इस मामले के आरोपी मेडिकल स्टूडंट और उसके डॉक्टर पिता को अग्रिम जमानत दे दी जाए। जस्टिस आर रघुपति ने कहा है कि अगर संबंधित पक्ष के वकील ने मंगलवार तक उनके सामने बिना शर्त माफीनामा पेश नहीं किया तो वह इस बारे में सरकार और प्रधानमंत्री को लिखेंगे। मामला पुडुचेरी के एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के छात्र एस . किरुबा श्रीधर और उसके डॉक्टर पिता सी कृष्णमूर्ति से जुड़ा है। इन दोनों के खिलाफ सीबीआई ने एक दलाल और पॉन्डिचेरी विश्वविद्यालय के एक अधिकारी की मदद से गैरकानूनी ढंग से अंक बढ़वाने का मामला दर्ज किया है।
सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस आर रघुपति ने कहा , ' एक केंद्रीय मंत्री ने मुझसे फोन पर संपर्क कर इस मामले में फैसले को प्रभावित करने की कोशिश की। मंत्री ने इस बात के लिए दबाव बनाने की कोशिश की कि याचिका कर्ताओं को अग्रिम जमानत दे दी जाए। ' जस्टिसरघुपति ने केंद्रीय मंत्री का नाम नहीं बताया , लेकिन कहा कि अगर बिना शर्त माफी नहीं मांगी जाती है तो वह इस बातचीत का जिक्र अपने फैसले में करेंगे। इसके बाद उन्होंने यह मामला चीफ जस्टिस एच . एल . गोखले के पास इस अनुरोध के साथ भेज दिया कि इसे किसी दूसरे जज के सुपुर्द कर दिया जाए।
सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस आर रघुपति ने कहा , ' एक केंद्रीय मंत्री ने मुझसे फोन पर संपर्क कर इस मामले में फैसले को प्रभावित करने की कोशिश की। मंत्री ने इस बात के लिए दबाव बनाने की कोशिश की कि याचिका कर्ताओं को अग्रिम जमानत दे दी जाए। ' जस्टिसरघुपति ने केंद्रीय मंत्री का नाम नहीं बताया , लेकिन कहा कि अगर बिना शर्त माफी नहीं मांगी जाती है तो वह इस बातचीत का जिक्र अपने फैसले में करेंगे। इसके बाद उन्होंने यह मामला चीफ जस्टिस एच . एल . गोखले के पास इस अनुरोध के साथ भेज दिया कि इसे किसी दूसरे जज के सुपुर्द कर दिया जाए।
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