Tuesday, July 14, 2009

रेप आरोपी बरी,

बलात्कार के एक मामले में पीड़िता को संदिग्ध चरित्र वाली महिला बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने
एक व्यक्ति को दोषमुक्त करार दिया है, जिसे एक निचली अदालत ने रेप का दोषी ठहराया था। जस्टिस मुकुंदकम शर्मा और जस्टिस बी.एस. चौहान की बेंच ने कहा कि यह एक ऐसी महिला लगती है जो यौन संसर्ग करती रहती थी। उसे अपने आनंद के लिए किसी भी जान-पहचान के शख्स के साथ घुलमिल जाने और खुली गतिविधियां करने में कोई आपत्ति नहीं थी। बेंच ने फैसले में कहा कि इस तरह वह एक संदिग्ध चरित्र वाली महिला दिखाई देती है। बेंच ने अभियोजन पक्ष के इस नजरिए को खारिज कर दिया कि पीड़िता नाबालिग थी।
इससे पहले आरोपी मूसाउद्दीन अहमद उर्फ मूसा को गुवाहाटी में कामरूप की एक सेशन कोर्ट ने बलात्कार का दोषी ठहराया था और 10 साल कैद की सजा सुनाई थी। मूसा ने गुवाहाटी हाई कोर्ट में अपील की थी। हाई कोर्ट ने भी उसे दोषी करार देने के फैसले पर मुहर लगाई लेकिन सजा घटाकर चार साल कर दी। मूसा ने अपनी याचिका में कहा था कि उसने कोई बलात्कार नहीं किया गया था और यह आपसी सहमति से यौन संबंधों का मामला है। याचिका को स्वीकारते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निचली अदालतों में पीड़िता से पूछताछ के दौरान जांच एजंसियों के समक्ष दिये गये बयानों में कई तरह के विरोधाभास थे।

प्रिंसिपल 20 सालों से छेड़छाड़ करता रहा

साकीनाका थाने में 39 साल की एक टीचर ने स्कूल के प्रिंसिपल के खिलाफ छेड़छाड़ का मामला दर्ज कराया है। दर्ज किए गए मामले में पीड़ित स्कूल टीचर ने आरोप लगाया है कि प्रिंसिपल पिछले 20 सालों से उसके साथ छेड़छाड़ करता रहा है। शिवराम विद्यामंदिर की इस टीचर ने यह आरोप प्रिंसिपल रमाशंकर श्रीवास्तव के खिलाफ लगाया है। अपने बयान में इस टीचर ने कहा है कि आरोपी उसे फोन करके पहले अपने केबिन में बुलाता था फिर उसके साथ अभद्रता करता था। विरोध करने पर वह उसे धमकाते हुए कहता कि अगर उसने ऐसा करने की हिमाकत की तो वह उसे बदनाम कर देगा। गौरतलब है कि एक स्थानीय न्यूज़ चैनल ने इस प्रिंसिपल की विवादित क्लिपिंग्स पहले अपने चैनल पर दिखाई थी जिसके बाद से ही यह प्रिंसिपल फरार बताया जा रहा है। साकीनाका पुलिस फिलहाल कालेज स्टॉफ से बात कर श्रीवास्तव के खिलाफ सबूत इकट्ठा कर रही है। NBT

मास्टर साहब ने बनाया बंधक, करते रहे यौन शोषण

नाबालिग लड़की के कथित यौन शोषण के आरोप में बडवानी स्थित शासकीय महाविद्यालय के एक सहायक प्राध्यापक को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार रविवार को सिलावद थाना क्षेत्र के अंतरसभा गांव की 16 वर्षीय लड़की की शिकायत पर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में इतिहास पढ़ाने वाले सहायक प्राध्यापक प्यारेलाल डूडवे को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में उसके घर में काम करने वाली महिला को भी गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक अन्य राजेंद्र नामक व्यक्ति की तलाश की जा रही है।
आरोपी प्राध्यापक और उसकी नौकरानी बालीबाई को सोमवार को यहां न्यायिक दंडाधिकारी रेखा दीक्षित की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार इस किशोरी को बालीबाई और राजेंद्र हाट बाजार ले जाने के बहाने बड़वानी लेकर आए थे और उसे प्राध्यापक को सौंपा गया था।
डूडवे ने कथित रूप से उक्त किशोरी को अपने घर में बंधक बनाकर उसका यौन शोषण किया। दो दिन पहले लड़की को उसके भाइयों ने मुक्त कराया है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रवींद्र कान्हरे ने बताया कि मामले की रिपोर्ट आयुक्त उच्च शिक्षा आयोग को भेज दी गई है। कॉलेज सूत्रों ने बताया कि खरगोन जिले के बड़वाह में शासकीय पद पर पदस्थ डूडवे की पत्नी ने उच्च शिक्षा विभाग को भेजे पत्र में पति को कथित रूप से व्यभिचारी बताते हुए उनका वेतन नहीं निकाले जाने की मांग पूर्व में की है।

एयरहोस्टेस से लेकर पायलट तक नशे में

विमान के उड़ान भरने से ठीक पहले पायलट या परिचालक दल के सदस्यों के नशे में पाए जाने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। पिछले छह माह में इस तरह के करीब एक दर्जन मामलों की रिपोर्ट डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) को भेजी गई है। नशे में धुत्त पाए गए कर्मचारियों में एयरहोस्टेस भी शामिल हैं। सबसे ताजा मामला सोमवार को हैदराबाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सामने आया, जहां मुंबई जाने वाली इंडियन एयरलाइंस की सेवा (आईसी-९४२) का एक फ्लाइट अटेंडेंट नशे में पाया गया।
एक निजी एयरलाइंस के अधिकारी का कहना है कि इस तरह के मामलों में वृद्धि चिंताजनक है। डीजीसीए इस तरह के क्रियाकलापों में लिप्त पाए गए पायलटों व चालक दल के सदस्यों पर लगातार नजर रखता है। उसके अधिकारी अक्सर उड़ान से पहले एयरपोर्ट का औचक निरीक्षण करते हैं। जो भी कर्मचारी नशे में पाया जाता है, उसे तत्काल ड्यूटी से हटा दिया जाता है। उन्हें ट्रेनिंग सेंटर पर दो माह के रिफ्रेशर कोर्सेज के लिए भेजा जाता है। सूत्रों ने बताया कि आमतौर पर त्योहारों के आसपास इस तरह की घटनाएं बढ़ जाती हैं। हालांकि विमानन कंपनियां शराब के प्रयोग को जरा भी बर्दाश्त नहीं करती हैं।

Monday, July 13, 2009

‘गुमशुदा’ स्वतंत्रता सेनानियों की तलाश

देश भर में चिह्नित एक लाख सत्तर हजार से अधिक स्वतंत्रता सेनानियों में से एक लाख से ज्यादा सेनानी लंबे समय से गुमशुदा हैं। उनकी गुमशुदगी से केंद्रीय गृह मंत्रालय परेशान है। स्वतंत्रता सेनानियों की पहचान करने और उन्हें पेंशन देने की जिम्मेदारी उसी पर है।
मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक लंबे समय तक ये स्वतंत्रता सेनानी पेंशन लेने नहीं पहुंचे तो मंत्रालय को चिंता हुई। अधिकारियों को आशंका है कि यह आंकड़ों में हेराफेरी और रजिस्टरों में सेनानी की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का मामला तो नहीं है। हाल ही में इस मामले में उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद बाबूओं को कार्रवाई का भय सता रहा है।
गुमशुदगी स्वयं मानी
मंत्रालय की स्वतंत्रता सेनानी इकाई के मुताबिक कुल 1.70 लाख सेनानियों को पेंशन के लिए चिह्नित किया गया है। हालांकि इनमें से सिर्फ 55 से 60 हजार सेनानी ही पेंशन ले रहे हैं। उसने बताया कि 2009-10 में पेंशन के लिए पांच सौ करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि का प्रावधान किया गया है।
कौन हैं स्वतंत्रता सेनानी
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रानी झांसी रेजीमेंट 1943-45, चौरी चौरा कांड 1922, गदर आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन1942 समेत 40 आंदोलनों में शिरकत करने वाले लोगों को स्वतंत्रता सेनानी माना है। इसके अलावा स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान छह माह की जेल या भूमिगत होने पर भी पेंशन की पात्रता होती है। महिलाओं व अनूसूचित जाति-जनजाति के मामलों में यह समय सीमा तीन माह है। स्वतंत्रता सेनानियों को 6330 से 7330 रुपए मासिक पेंशन दी जाती है। इसके अलावा 79 प्रतिशत महंगाई राहत भी दी जाती है। अविवाहित-बेरोजगार पुत्रियों के मद में 1500 रुपए मासिक के साथ 79 प्रतिशत महंगाई राहत दी जाती है। इसी तरह क्रांतिकारियों के माता-पिता के लिए महंगाई राहत के साथ हजार रुपए प्रति व्यक्ति दिए जाते हैं।
कहां-कितने स्वतंत्रता सेनानी
-मंत्रालय के 2008 के आंकड़ों के अनुसार देश भर में पेंशन योग्य सेनानियों की संख्या 1,70,375 थी।
-आजाद हिंद फौज के 22,468 सैनिकों को भी स्वतंत्रता सेनानी माना गया था।
-लक्षद्वीप, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश ऐसे तीन राज्य हैं, जहां 2008 के अांकड़ों के अनुसार एक भी व्यक्ति स्वतंत्रता सेनानी के रूप में दर्ज हैं। BHASKAR

मैं आत्महत्या कर लूंगी: साध्वी प्रज्ञा ठाकुर

2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए ब्लास्ट मामले में मुख्य आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने
एक सनसनीखेज बयान में कहा है कि वह आत्महत्या कर लेंगी। साध्वी ने इस धमकी के पीछे जो वजह बताई है उसके मुताबिक उनके साथ जेल के अंदर अच्छा बर्ताव नहीं होता है। 11 जुलाई को मीडिया के नाम लिखी चिट्ठी में साध्वी ने कहा है कि जेल के अंदर पुलिस, अस्पताल कर्मियों और जेल अफसरों द्वारा उनके साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार से वह आजिज आ गई हैं। वह आजकल मुंबई के भायखला जेल में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बेहद खराब स्वास्थ्य के बावजूद उन्हें एंबुलेंस के बजाय जेजे अस्पताल पुलिस की जीप में ले जाया गया। साध्वी के वकील नवीन ने आरोप लगाया कि मोहम्मद अजमल कसब जैसे आतंकियों को जहां जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है, वहीं हिंदुत्व की अवधारणा का समर्थन के चलते उन्हें जेल में परेशान किया जा रहा है। साध्वी ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र राज्य एटीएस ने इस मामले में उन्हें फंसाया है। गौरतलब है कि साध्वी ने इससे पहले विशेष मकोका कोर्ट में जेल में उनके साथ हो रहे बुरे बर्ताव का आरोप लगाते हुए दो बार एप्लिकेशन लिखी है, जिसके बाद कोर्ट ने जेल अफसरों को आरोपों की जांच करने को कहा था और साध्वी को जेजे हॉस्पिटल ले जाए जाने का निर्देश दिया था।

चीन कर सकता है भारत पर 2012 तक हमला

एक टॉप डिफेंस एक्सपर्ट ने अनुमान जताया है कि चीन आंतरिक असंतोष, बढ़ती बेरोजगारी और वित्तीय समस्याओं से अपने लोगों का ध्यान बंटाने के लिए भारत पर 2012 तक हमला कर सकता है। उनका मानना है कि ये समस्याएं उस देश पर कम्युनिस्टों की पकड़ को खतरा पैदा कर रही हैं। 'इंडियन डिफेंस रिव्यू' के एडिटर भारत वर्मा ने कहा है कि 2012 से पहले चीन भारत पर हमला करेगा। निराश पेइचिंग के लिए भारत को अंतिम सबक सिखाने के कई कारण हैं जिसके जरिए वह एशिया में इस सदी में चीन की सर्वोच्चता सुनिश्चित करना चाहेगा। उन्होंने कहा कि मंदी ने निर्यात दुकानों को बंद कर दिया है जिससे आंतरिक सामाजिक अशांति पैदा हो रही है जो समाज पर कम्युनिस्टों की पकड़ को गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। वर्मा ने संपादकीय में कहा है कि इस आकलन के अन्य कारणों में बढ़ती बेरोजगारी, अरबों डॉलर मूल्य की पूंजी उड़न छू होने, इसके विदेशी मुद्रा भंडार में कमी और बढ़ता आंतरिक असंतोष है। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त चीन की शह पर भारत के खिलाफ काम करने वाले उनके दाहिने हाथ पाकिस्तान की बढ़ती अप्रासंगिकता चीन की बेचैनी को बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति बाराक ओबामा की अफगान-पाक नीति मूलत: पाक-अफगान नीति है जिसने बड़ी चतुराई से चोर के पीछे चोर लगा दिया है। वर्मा ने कहा कि पेइचिंग के साथ अपनी निकटता से पाकिस्तान पहले ही हिला हुआ है, जो सही मायने में गृहयुद्ध में फंसा हुआ है और भारत के खिलाफ अहमियत खो रहा है। उन्होंने कहा कि सबसे खास बात यह है कि अमेरिका और पश्चिम के साथ भारत के बढ़ते तालमेल से चिंतित है। उन्होंने कहा कि चीनी कम्युनिस्टों की ये सभी चिंताएं शांतिवादी भारत के खिलाफ युद्ध से ही हल होती है ताकि बहुआयामी रणनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति की जा सके। चीन ने जहां उत्तर कोरिया को छिपे तौर पर भूमिगत परमाणु परीक्षण और मिसाइल परीक्षण करने की इजाजत दी, वहीं यह दक्षिण चीन सागर में अपनी नौसैनिक मौजूदगी भी बढ़ा रहा है ताकि अलग अलग पड़े द्वीपों के उसके दावे का विरोध करने वालों को डरा सके। उन्होंने कहा कि मंदी प्रभावित चीन के लिए इस समय जापान सहित पश्चिमी हितों के खिलाफ बढ़ना समझदारी नहीं होगी। इसलिए सबसे आकर्षक विकल्प भारत जैसे नरम लक्ष्य पर हमला करना और पूर्वोत्तर में इसकी जमीन को जबरन कब्जा करना है। लेकिन, भारत चीनी खतरे का सामना करने के लिए जमीनी स्तर पर कम तैयार है।