Wednesday, July 29, 2009

सोना बेचो और पैसा बनाओ!

कीमतों में आई तेजी ने लोगों में सोने को बेचकर पैसा बनाने का ट्रेंड पैदा किया है और लोग अपने परिवार के पुराने गहने बेचकर जमकर मुनाफा कमा रहे हैं। दरीबा बाजार के रतनचंद ज्वालानाथ जूअलर्स के तरुण गुप्ता बताते हैं, 'ऐसा पहली बार हो रहा है जब लोग गहनों को बेचकर कैश ले जा रहे हैं। इससे पहले जो भी लोग आते थे वे पुराने सोने के बदले में सोने के नए गहने खरीदकर ले जाते थे। हालांकि यह ट्रेंड जनवरी से अप्रैल के दौरान ज्यादा रहा और अब इसमें कमी आ रही है।' जानकारों के मुताबिक जब सोने में 2,000 से 3,000 रुपये प्रति 10 ग्राम की तेजी आती है तो लोग सोना बेचना शुरू कर देते हैं। चांदनी चौक के कूचामहाजनी के बुलियन मर्चेन्ट एसोसिएशन के प्रेजिडंट श्रीकिशन गोयल के मुताबिक, 'सोना 10,000 से 14,000 के स्तर पर आया तो स्क्रैप की बिक्री में भारी तेजी आई। अब कुछ कमी आई है। लोग भाव बढ़ने के इंतजार में हैं।' गोयल के मुताबिक दिल्ली में 200 से 300 टन सोने की सालाना खपत होती है। जूअलर्स के कारोबारी बताते हैं कि दिल्ली में पहले कोई दुकानदार दिनभर में 100 ग्राम गहने बेचता था तो उसके पास केवल पांच ग्राम पुराना सोना बिक्री को आता था। सोने के भाव में आई तेजी से यह ट्रेंड बदल गया है। गुप्ता बताते हैं, 'जनवरी से अप्रैल के दौरान नए सोने की बिक्री तो गिरकर 10 ग्राम पर आ गई जबकि दुकानदारों के पास बिकने वाले पुराने सोने की मात्रा 100 ग्राम हो गई।' जानकारों के मुताबिक स्क्रैप बिक्री की प्रवृत्ति पहले भी थी लेकिन सोने के 14,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंचने को लोगों ने इसकी बिक्री के जरिए पैसा बनाने का बेहतरीन मौका माना है। बोनांजा ब्रोकरेज के असिस्टेंट वाइस प्रेजिडंट(गोल्ड) विभुरतन धारा के मुताबिक, 'लोगों ने इस बार स्क्रैप गोल्ड की काफी बिक्री की है। ऊंची कीमतें इसकी सबसे बड़ी वजह है। साल 2005-06 के 7,000 रुपये के स्तर से जब सोने के भाव फरवरी 2007 में 10,758 रुपए के स्तर पर पहुंचे थे, उस वक्त भी सोने के स्कैप की घरेलू बिक्री में तेजी आई थी।'

नस्लवाद का शिकार महिला पुलिसकर्मी

लंदन एक ट्रिब्यूनल ने एक सिख महिला पुलिसकर्मी को नस्ली भेदभाव का शिकार पाया है। इस आदेश के बाद महिला को हर्जाने के तौर पर हजारों पाउंड मिलने तय हैं। एक इंप्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल ने पाया कि अमनदीप कौर ग्रेवाल को मेट्रोपॉलिटन पुलिस के साथ ट्रेनिंग के दौरान नस्ली और धार्मिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। कौर ने इसके एवज में हर्जाने की मांग की थी। भारतीय मूल की इस महिला का दावा है कि उसकी ट्रेनर लुसिंडा रिग्बी ट्रेनिंग के दौरान उसके साथ जरूरत से ज्यादा सख्ती बरतती थी।

Tuesday, July 21, 2009

डॉ. कलाम के साथ बदसलूकी

भारतीय मिसाइल कार्यक्रम के जनक माने जाने वाले डॉ . कलाम के साथ दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर बदसलूकी की गई। पिछले दिनों अमेरिका की एक एयरलाइन कंपनी के कर्मचारियों ने सुरक्षा जांच के नाम पर डॉ . कलाम की जेब में रखा पर्स , उनका मोबाइल ही नहीं बल्कि जूते तक उतरवा लिए। कलाम के साथ यह घटना उस समय हुई जब वह सरकारी यात्रा पर कॉन्टीनेंटल एयरलाइंस की फ्लाइट संख्या सीओ -083 से न्यू यॉर्क जा रहे थे। वाकया इसी साल 24 अप्रैल का है। इस दौरान डॉ . कलाम के साथ भारत सरकार के एक प्रोटोकॉल अधिकारी कस्टम , सीआईएसएफ , इमीग्रेशन और डायल के अफसर एयरोब्रिज के नजदीक पहुंचे। वहां मौजूद कॉन्टीनेंटल एयरलाइंस के अफसरों ने डॉ . कलाम को सुरक्षा जांच के लिए लाइन में लगने को कहा। प्रोटोकॉल अफसरों ने जांच अधिकारियों को डॉ . कलाम के कद और पद के बारे में सूचित भी किया।
बावजूद इसके अपने देश की सरजमीं पर ही उन्हें एयरलाइंस के जांच अधिकारियों ने सुरक्षा संबंधी जांच में छूट देने से इनकार कर दिया। अधिकारियों ने न केवल डॉ . कलाम का पर्स , मोबाइल स्कैन किया बल्कि उनके जूते तक उतरवा लिए। डॉ . कलाम ने अपनी सादगी का परिचय देते हुए अफसरों की मांग के मुताबिक न केवल जांच से सहयोग किया बल्कि बिना शिकायत विमान में सवार हो गए। एयरपोर्ट सूत्रों के मुताबिक , कॉन्टिनेंटल एयरलाइंस ने इंडियन एयरलाइंस की सब्सिडरी कंपनी एएसएल को सुरक्षा जांच की जिम्मेदारी सौंपी हुई है। कलाम की जांच करने वाली टीम के सदस्य का कहना है कि पूर्व राष्ट्रपति को देखने के बाद वह असमंजस में पड़ गए लेकिन मौके पर मौजूद एयरलाइंस के विदेशी अधिकारी ने नो वन इज एग्जेम्टेड ( किसी को छूट नहीं ) कहते हुए जांच के आदेश दिए। इसी एयरलाइंस से जुडे़ एक अन्य अधिकारी ने घटना को शर्मनाक बताते हुए कहा , कई बार इसी कंपनी के कर्मचारी भारत में प्रशिक्षण के लिए आते हैं और कभी सुरक्षा जांच से नहीं गुजरते हैं , लेकिन यह एयरलाइंस अक्सर भारत के प्रतिष्ठित नागरिकों और राजनयिकों की सुरक्षा जांच के नाम पर बेइज्जत करती आई है। जबकि , कानून के मुताबिक राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री , पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व प्रधानमंत्रियों को एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच से छूट मिलती है। लेकिन इस अमेरिकी एयरलाइन कंपनी ने नियमों की धज्जियां उड़ा दीं। इस मामले की गूंज संसद में भी मंगलवार को सुनाई दी। बीजेपी ने राज्यसभा में इस मामले को जोरदार तरीके से उठाते हुए अमेरिकी एयरलाइन की उड़ानों पर रोक लगाने की मांग कर दी। वहीं , समाजवादी पार्टी ( एसपी ) के वरिष्ठ नेता जनेश्वर मिश्र ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि यह मामला महज प्रक्रियागत या खानापूरी नहीं है। बल्कि इसके पीछे काले - गोरे , ऊंचे - नीचे इंसानों की सोच काम कर रही है। उन्होंने गांधी , मंडेला और राम मनोहर लोहिया जैसी हस्तियों का नाम इस सिलसिले में लेते हुए पूरे मामले को एक भारतीय का अपमान करार दिया। उन्होंने कहा कि यह साफ तौर पर रंगभेद का मामला है। बीजेपी के राज्यसभा नेता अरुण जेटली ने भी कहा कि यह महज जांच का मुद्दा नहीं है बल्कि मामले की गंभीरता कहीं आगे तक है। सदन की भावनाओं को भांपते हुए सरकार की ओर से नागरिक उड्डयन मंत्री ( सिविल एविएशन मिनिस्टर ) प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि मैं सदन की भावनाओं का सम्मान करता हूं और इस मामले में जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

रेप की शिकार मानसिक विकलांग को मिली मां बनने की इजाजत

सुप्रीम कोर्ट ने मानसिक रूप से विकलांग एक रेप पीड़ित महिला को अपने बच्चे को जन्म देने की इजाजत दे दी है। चीफ जस्टिस के. जी. बालकृष्णन और जस्टिस पी. सदाशिवम की बेंच ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। यह महिला चंडीगढ़ के एक केयर होम में रेप का शिकार हुई थी, जिसके बद यह प्रेगनंट हो गई थी। इसे 19 महीने की प्रेगनंसी है। सामाजिक कार्यकर्ता मांग कर रहे थे कि महिला को बच्चे को जन्म देने की इजाजत न मिले, क्योंकि बच्चे पर गलत असर पड़ेगा। उधर महिला के वकील उसके इजाजत दिए जाने की मांग कर रहे थे। कोर्ट इस महिला को लेकर काफी चिंतित थी, क्योंकि यह महिला अनाथ है और उसे कोई सामाजिक समर्थन प्राप्त नहीं है। कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को आदेश दिया है कि इस महिला और उसके बच्चे की देखभाल करे।

Thursday, July 16, 2009

पूरी तनख्वाह चैरिटी में दे देते हैं श्रीधरन

पिछले कई दिन मेट्रो चीफ ई. श्रीधरन के लिए काफी मुश्किल भरे रहे। पिछले रविवार को मेट्रो साइट पर हुए हादसों के बाद तो उन्होंने जाने की तैयारी कर ली थी, लेकिन शीला सरकार ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें अपने पद पर बने रहने के लिए कहा। रविवार को हुए इन हादसों के बाद अपने पहले इंटरव्यू में श्रीधरन ने NBT सहयोगी संवाददाता मेघा सूरी के साथ खुलकर बात की और अपने दिल की बात कही। रविवार को जब आपने इस्तीफा देने का फैसला किया उस वक्त आपके दिमाग में क्या चल रहा था? कई कारण थे जिसके कारण मैंने यह फैसला लिया था। मैं पिछले 11 सालों से मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़ा हूं और हमारा रेकॉर्ड भी काफी अच्छा रहा है। पिछले साल लक्ष्मी नगर में हुए हादसे के बाद हमने सिक्यूरिटी मेजर्स और मॉनिटरिंग बढ़ा दी थी। मैंने इस बात की भी हिदायत दी थी कि अगर जरा भी इस बात का अंदेशा हो कि सुरक्षा के लिहाज से कहीं कोई कमी है तो तुरंत साइट पर काम रोक दिया जाए। लेकिन इस सब के बाबजूद अगर ऐसा हादसा दोबारा होता है तो मुझे इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
भगवान न करे , अगर फिर ऐसा हादसा हो तो क्या आप दोबारा इस्तीफा देंगे। और क्या तो तब यह नहीं कहा जाएगा कि आप जिम्मेदारियों से भाग गए? जब तक मेट्रो का फेज़-2 (कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 तक)पूरा नहीं होता, मैं ऑर्गनाइजेशन को छोड़कर कहीं नहीं जाने वाला, चाहे जो हो जाए। यह मेरी ड्यूटी है, देश के प्रति मेरा उत्तरदायित्व है। मुख्यमंत्री, जयपाल रेड्डी और कई लोगों के मुझे आश्वासन दिया है कि वे मेरे साथ हैं। यहां तक की राहुल गांधी ने भी फोन करके मुझे कहा कि प्लीज मत जाइए, हम आपके साथ हैं। लेकिन आपको क्या लगता है कि रविवार का हादसा क्यों हुआ? मैं भी जानना चाहता हूं कि इसके पीछे क्या कारण हैं। लेकिन एक एंजीनियर होने के नाते मेरा अपना अनुभव यह कहता है कि यह खंभे की डिजाइन की गड़बड़ी के कारण हुआ है। मार्च में इस खंभे में दरार देखी गई थीं और मैंने खुद उसे देखने भी गया था। मैं खुद संतुष्ट नहीं था और इसलिए मैंने एक सेफ्टी टीम को इसकी देखरेख करने के काम में लगाया था, लेकिन उनका निष्कर्ष था कि दरारें ऊपरी हैं। लेकिन तब भी मैं संतुष्ट नहीं था। इसलिए हमने यह फैसला किया है पिलर पर पूरा लोड डालकर टेस्ट किया जाएगा... इसका मतलब है कि आप चाहते थे कि पिलर को गिरा दिया जाए? हां, मैं चाहता था कि उसे उसी वक्त गिरा दिया जाता। लेकिन यह संभव नहीं था क्योंकि एक दूसरा गर्डर को पहले ही ऊपर उठाया जा चुका था और वह पिलर पर रखा जा चुका था। इस गर्डर का भार 450 टन था और पिलर को तब तक नहीं गिराया जा सकता था जब तक गर्डर को उस पर से हटाया न जाए। मेरी टीम ने मुझे कहा कि फिलहाल इस टेस्ट को न किया जाए और कंट्रक्शन पूरा होने और फिनिशिंग के बाद पिलर को टेस्ट कर लिया जाए। और मैंने उनकी सलाह के आगे सिर झुका दिया। और इसी का मुझे अफसोस है। यही कारण है कि मुझे लगा कि यह मेरी नैतिक जिम्मेदारी है। मुझे अपने फैसले पर अड़े रहना चाहिए था और पिलर को उसी वक्त गिरा देना चाहिए था। लेकिन उस वक्त अपने फैसले से पीछे हटना ही मेरी सबसे बड़ी गलती थी। अगर 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स की डेडलाइन नजदीक नहीं होती, तो क्या आपको लगता है कि आप अपने फैसले पर बने रहते और उस पिलर को गिरा देते? नहीं, यह बात नहीं है। हम इस लाइन पर पहले ही अपनी समयसीमा से 5-6 महीने आगे काम कर रहे हैं और अभी हमारे पास काफी समय है। अगर मैं सच में चाहता, तो उस पिलर को नष्ट करवा सकता था। हादसे के बाद लाइन पर काम में देरी होगी? इस साइट पर अब कम से कम तीन महीने की देरी होगी, लेकिन इससे इस पूरी लाइन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि बाकी जगह पर काम चल रहा है।
ऐसी अफवाहे हैं कि जब इस लाइन को बनाने का फैसला किया गया था तब ज्यादातर लोग चाहते थे कि इसे अंडरग्राउंड बनाया जाए। इस हादसे के बाद आपको लगता है कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में मेट्रो अंडरग्राउंड ही हो, फिर चाहे इसकी लागत ज्यादा ही क्यों न हो?
अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट में खतरे और ज्यादा होते हैं। वहीं लागत भी तीन गुना बढ़ जाती है और टाइम भी कहीं ज्यादा लगता है। मुझे लगता है कि जहां भी संभव हो हमें मेट्रो को ऊपर ही बनाना चाहिए।
आपको क्या लगता है ऐसे बड़े प्रोजेक्ट पर काम करने में सबसे बड़ी रुकावटें क्या हैं?
बड़े कॉन्ट्रैक्टर्स की बहुत कमी है, जो इस तरह के प्रोजेक्ट को पूरा कर सकें। कुछ बड़े कॉन्ट्रैक्टर्स जैसे- एल ऐंड टी ( L&T )ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम नहीं करना चाहते जिनकी कीमत 300-400 करोड़ से कम हो। हमारे ज्यादातर टेंडर्स 100-120 करोड़ रुपए के हैं। सरकार ने कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले जिस आखिरी लाइन को अनुमित दी थी वो है- बदरपुर लाइन। लेकिन जब हमने बदरपुर लाइन के 10 स्टेशनों के लिए टेंडर मंगाए तो हमें कोई टेंडर नहीं मिला। तब हमने दोबारा टेंडर निकाला और तब सिर्फ हमें एक टेंडर मिला और वह था- गैमन। हम अपने 2-3 कॉन्ट्रैक्टर्स के काम से संतुष्ट नहीं हैं लेकिन हमारे पास उन्हें बदलने के लिए कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है। NBT

पर्यावरणविद डॉ.जी.डी. अग्रवाल 5 अगस्त को करेंगे अनशन

प्रसिद्ध गांधीवादी और पर्यावरणविद् डॉ.जी.डी. अग्रवाल ने लोहारीनाग-पाला परियोजना पर कार्य फिर आरंभ किए जाने के विरोध में पांच अगस्त से आमरण अनशन करने की घोषणा की है, लेकिन उनके अनशन का स्थल अभी तय नहीं है। डा.अग्रवाल के करीबी पर्यावरण कार्यकर्ता पवित्र सिंह ने देहरादून से टेलीफोन पर बताया कि न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए परियोजना स्थल पर दिन-रात काम जारी है। इसका विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं को जिला प्रशासन धमका रहा है। गौरतलब है कि नैनीताल उच्च न्यायालय ने 18मई 2009 के अपने आदेश में केंद्र सरकार को लोहारीनाग-पाला परियोजना के संबंध में स्पष्ट निर्णय लेने या सलाह देने के लिए चार सदस्यीय समिति के गठन का आदेश दिया था। पवित्र सिंह ने बताया कि अनशन स्थल अभी तय नहीं है और समय तथा परिस्थिति के अनुसार डॉ.अग्रवाल खुद इसके बारे में फैसला लेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि नई दिल्ली या हरिद्वार में किसी एक स्थान पर डॉ.अग्रवाल आमरण अनशन के लिए बैठेंगे। डा.अग्रवाल ने सरकार के आश्वासनों के बावजूद गंगा के अस्तित्व को खतरे में डालने वाली परियोजनाओं पर निर्माण कार्य जारी रखने से निराश होकर आमरण अनशन पर बैठने का फैसला किया है।

आतंकवाद बड़ा खतरा

मिस्र के शहर शर्म अल शेख में गुटनिरपेक्ष देशों के सम्मेलन में अब से ठीक 30 मिनट बाद भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाक प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसके बाद दोनों देशों ने एक संयुक्त साझा बयान जारी किया है। इस साझा बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद को एक बड़ा खतरा बताया है। दोनों देश यह मानतें है कि आतंकवाद दोनों देश के लिए खतरा है और इससे लड़ने के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे।भारत और पाक के दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच बेहतर माहौल में बातचीत हुई है और दोनों देशों ने माना की संबंधों में सुधार के लिए बातचीत एक बेहतर अवसर है।