Friday, March 6, 2009

इंटरनेट के इस्तेमाल से बुजर्गो की दिमागी ताकत बढ़ाने में मदद

कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के एक शोध से संकेत मिले हैं, कि इंटरनेट के इस्तेमाल से अधेड़ उम्र के लोगों और बुजर्गो की दिमागी ताकत बढ़ाने में मदद मिल सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे आयु संबंधी उन मनोवैज्ञानिक बदलावों के मामलों में भी मदद मिल सकती है, जिससे दिमाग की कार्य करने की गति धीमी हो जाती है। यह अध्ययन अमेरिकन जर्नल ऑफ़ गेरियाटिक साइकेट-ी में प्रकाशित हआ है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, दिमाग में कई बदलाव आने लगते हैं। इन बदलावों में कोशिकाओं का संकुचन और उनकी सक्रियता में कमी आना भी शामिल है, जो किसी व्यक्ति की कार्य कुशलता को प्रभावित कर सकते हैं। लंबे समय से माना जा रहा है कि वर्ग पहेली, सुडोकू जैसी दिमाग़ी कसरतों से दिमाग सक्रिय बना रहता है। नवीनतम अध्ययन से संकेत मिला है कि इस सूची में वेब सर्फिग को भी शामिल किया जा सकता है। रोज़ाना वेब सर्च जैसा एक साधारण कार्य बुजर्गो के दिमाग को दुरूस्त रखता है। यह अध्ययन 55 से 76 आयुवर्ग के 24 लोगों पर किये शोध पर आधारित है। इनमें से आधे लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते थे, जबकि बाकी लोग इससे दूर थे। किताब पढ़ने और इंटरनेट पर सर्च करने के दौरान इन लोगों का ब्रेन स्कैन किया गया। दोनों ही कार्यो से दिमाग के उस हिस्से में उल्लेखनीय गतिविधियां दर्ज की गयीं, जो भाषा, अध्ययन, स्मृति और दृश्य क्षमताओं को नियंत्रित करती हैं। वेब सर्च करने के दौरान दिमाग के अलग-अलग हिस्सों में अतिरिक्त उल्लेखनीय गतिविधियां देखी गयीं, जो निर्णय लेने की प्रक्रिया और जटिल तार्किकता को नियंत्रित करती हैं। जबकि वेब सर्च नहीं करनेवालों के दिमाग में ऐसी कोई हलचल नहीं पायी गयी।

Thursday, March 5, 2009

पाक बोला, भारत से आए थे आतंकी

लाहौर में श्रीलंका की क्रिकेट टीम पर जानलेवा हमला करआतंकवादी बड़ी आसानी से बच निकले और पाकिस्तान की पुलिस बस हाथ मलती रह गई। अब पाकिस्तान इस हमले का कनेक्शन भारत से जोड़ रहा है। पाकिस्तान के एक मंत्री की माने तो इस हमले के पीछे भारत का हाथ है और आतंकी भारत से आए थे। पाकिस्तान के शिपिंग राज्यमंत्री सरदार नबील अहमद गबोल ने कहा, 'हमें अब तक जो सबूत मिले हैं, वह बताते हैं कि हमलावर भारत की तरफ से आए थे।' उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान को पूरी दुनिया में बदनाम करने की साजिश है। उनका कहना था कि यह मुंबई पर हुई हमले का बदला था। यही नहीं गबोल ने इसे भारत की तरफ से खुली जंग तक कह डाला। बता दें कि गबोल आसिफ अली जरदारी की पार्टी से ही हैं।

कश्मीर घाटी में चिनार के पेड़ों की कटाई पर रोक

लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने वाले कश्मीर के मशहूर चिनार के पेड़ों की कटाई पर कश्मीर घाटी में रोक लगा दी गई है। कश्मीर के एक अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि जैवविज्ञानियों, पर्यावरणविदों और गैर सरकारी संगठनों की ओर से घाटी में चिनार के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई संबंधी ढेरों शिकायतों मिलने के बाद यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि चिनार कश्मीर की विरासत के अभिन्न अंग रहे हैं, लेकिन अंधाधुंध कटाई के कारण तेजी से विलुप्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि चिनार का एक पेड़ काटने की अनुमति इस शर्त पर दी जाएगी कि इसके एवज में इसके पांच पेड़ लगाने होंगे।

शादी के लिए छह किलोमीटर लंबी सड़क बनाने का बीड़ा उठा लिया कुंवारों ने

बिहार के एक गाँव के 100 से अधिक कुंवारों ने शादी के लिए छह किलोमीटर लंबी सड़क बनाने का बीड़ा उठा लिया है। पश्चिमी बिहार में कैमूर पहाड़ियों पर स्थित बरवान कलाँ गाँव आस-पास के इलाक़ों में “कुँवारों का गांव” के नाम से प्रसिद्ध है। इस गाँव के 16 वर्ष से 80 वर्ष तक के 121 निवासी अभी तक कुँवारे हैं। उनका मानना है कि वे इसलिए कुंवारे रह गए क्योंकि उनके गाँव तक पहुँचना कठिन है। ये कहा जाता है कि उस गांव में आख़िरी बार 50 साल पहले शादी हुई थी। एक 50 वर्षीय कुँवारे निवासी रामचंद्र खरवार ने बीबीसी को बताया “जो लोग अपनी शादी करने में सफल रहे उन्होंने भी यह काम चोरी-छिपे अपने रिश्तेदारों के गाँव में पनाह लेकर किया है जो उनके गाँव के मुक़ाबले कम बीहड़ हैं। ” बरवान कलाँ पहुंच पाना न सिर्फ़ मुश्किल है बल्कि बाहर वाले लोग उस इलाक़े से इसलिए भी भयभीत हैं कि वहाँ माओवादी सक्रिय हैं और वहां से अपने हथियारबंद अभियान चलाते हैं। खाद्य सामग्री की सप्लाई कम है। गांव में लगे पानी के छह हैंडपंप में से कोई भी चालू हालत में नहीं है, वहाँ के एकमात्र सरकारी स्कूल में कोई शिक्षक नहीं है। सबसे नज़दीकी पुलिस थाना और हस्पताल गांव से 45 किलोमीटर की दूरी पर है। विकास के आभाव के कारण बहुत से परिवार अपनी बेटियों की शादियाँ उस इलाक़े के कुंवारों के साथ करने के लिए राज़ी नहीं हैं। उस गांव के एक 40 वर्षीय कुंवारे रामलाल यादव ने अफ़सोस जताते हुए कहा “हमारे और बाहरी लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी की बात मुश्किल पहाड़ी रास्ते हैं। ” सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रमा सिंह यादव का कहना है कि कुंवारों की बड़ी संख्या का कारण ये नहीं कि वे योग्य नहीं हैं बल्कि यह है कि उनके गांव को जोड़ने वाला कोई रास्ता नहीं है। पिछले असेंबली चुनाव में उस समय कुंवारे गांव वालों की उम्मीदें बढ़ी थीं जब आज़ादी के बाद से पहली बार उस गांव में किसी चुनाव प्रचार लिए आने वाले एक प्रत्याशी ने उनसे वादा किया था कि उनके विवाह की मुश्किलें आसान की जाएँगी। विधायक रामचंद्र सिंह ने 1500 की आबादी वाले गांव से वादा किया था कि वे जब तक उनके लिए एक सड़क हासिल नहीं कर लेते वह भी विवाह नहीं करेंगे। उनके वादे पर विश्वास करके गांव वालों ने रामचंद्र यादव को 2005 के विधानसभा चुनाव में जिताने में मदद की। लेकिन चुनाव जीतने के एक साल बाद ही असेंबली के नवनिर्वाचित सदस्य ने न सिर्फ़ अपनी शादी रचाई बल्कि गांव वालों के ज़ख़्मों पर नमक छिड़कने के लिए बड़ी धूमधाम से शादी की। जब गांव वाले उन्हें उनका वादा याद दिलाने उनके पास पहुंचे तो उन्होंने गांव वालों से पूछा कि क्या उन्होंने ये विश्वास कर लिया था कि वे उनके लिए हमेशा अविवाहित रहेंगे। विधायक रामचंद्र सिंह ने अपने क़दम का ख़ुलासा करते हुए बीबीसी को बताया, “मैंने इस समस्या को उठाने की भरपूर कोशिश की। यहां तक कि मैंने विधानसभा में तीन साल में मैंने छह बार इस गांव के मुद्दे को उठाया। हम लोग अपने तौर पर भी इस मामले में कुछ नहीं कर सकते क्योंकि ये इलाक़ा वन्यजीव संरक्षण विभाग के अधीन आता है। ” इंतज़ार करके थक चुके गाँववालों ने अब अपनी ज़िम्मेदारी ख़ुद उठा ली है। फावड़े, छेनी, हथौड़े, कुल्हाड़े और दूसरी चीज़ों से लैस कुंवारों ने ख़ुद सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया है। पिछले डेढ़ महीने में उन्होंने पहाड़ी ज़मीन पर लगभग तीन किलोमीटर लंबे रास्ते का काम पूरा कर लिया है। अगर एक समूह बड़े-बड़े पत्थरों को रास्ते से हटाने पर लगा हुआ है तो दूसरा ग्रुप उनको छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर बिछाने में लगा हुआ है। काम दिन रात जारी है। गांव को पूरे भभुआ ज़िले से जोड़ने के लिए सिर्फ़ तीन किलोमीटर का रास्ता बनाना रह गया है। विवाह के एक उम्मीदवार 28 वर्षीय शिव खरवार ने कहा “हम लोग जल्द ही इसे बना लेंगे और दूसरे लोगों की तरह एक दिन हमारी भी शादी होगी। ” बाहर की दुनिया के साथ संपर्क स्थापित करने के लिए सड़क बनाने में जुटे रोहित यादव, राम लाल, प्रचारी खरवर, देव नाथ, राजगृहा, रामाशीष जैसे लोगों ने भी यही आशा जताई। गांव के भूतपर्व मुखिया राम दयाल के मुताबिक़ इस सड़क के बन जाने से 40 किलोमीटर लंबा रास्ता बहुत छोटा हो जाएगा और आसपास के दस गाँव के लगभग 10 हज़ार लोग इस से लाभ उठा सकेंगे। दुर्भाग्य से गांव में शादियाँ बढ़ाने के मिशन पर निकले लोगों के सामने बड़ी क़ानूनी अड़चनें भी हैं। यह इलाक़ा वन्यजीवन संरक्षण वाले क्षेत्र में आता है जहां सड़क बनाने की कड़ी शर्तें हैं। ज़िला वन्य अधिकारी आरके राम ने कहा “गांव वाले जो कुछ कर रहे हैं वह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है। हम लोग सारे ज़रूरी क़दम उठाएंगे। ” लेकिन गांव के कुंवारे अपने काम को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने एक आवाज़ में अपने औज़ार हवा में लहराकर कहा, “जो भी हो हम लोग छह किलोमीटर लंबी सड़क को बिना पूरा किए नहीं रुकेंगे। ”

हार नहीं मानी जब्बार ने

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में पिछले 44 साल से 10वीं कक्षा की परीक्षा में फेल होने के बावजूद 65 वर्षीय जब्बार ने हार नहीं मानी है। बिना नकल किए परीक्षा पास करने की शपथ लेने वाले जब्बार 45वीं बार परीक्षा दे रहे हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक प्रेम प्रकाश मौर्या ने बुधवार को बताया कि प्राइवेट छात्र के तौर पर जब्बार जिले के आदर्श जनता इंटर कालेज में परीक्षा दे रहे हैं। मौर्या के मुताबिक जब्बार उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा में भाग लेने वाले अब तक के सबसे उम्रदराज छात्र हैं।फतेहपुर के बिंदकी में परचून की दुकान चलाने वाले जब्बार ने परीक्षा देने के लिए अंग्रेजी माध्यम चुना है। जब्बार को भरोसा है कि इस बार उन्हें परीक्षा पास करने में उनका पुराना अनुभव काम आएगा। परीक्षा देकर बाहर निकले जब्बार ने संवाददाताओं को बताया कि पिछले साल बहुत छोटी सी गलतियों की वजह से वह फेल हो गए थे, लेकिन इस बार वह परीक्षा पास होने के प्रति वह पूरी तरह आश्वस्त हैं।

Wednesday, March 4, 2009

हमलावरों की जानकारी देने पर एक करोड़ रुपये इनाम

श्रीलंका क्रिकेट टीम पर मंगलवार को हुए हमले के संबंध में पाकिस्तानी अधिकारियों ने 12 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया है और सरकार ने हमलावरों के संबंध में जानकारी देने पर एक करोड़ रुपये इनाम देने की पेशकश की है। गौरतलब है कि मंगलवार को हुए इन हमलों में छह खिलाड़ी घायल हुए थे। शहर के गुलबर्ग क्षेत्र में विशेष जांच दल द्वारा छात्रावासों और गेस्ट हाउस में मारे गए छापों में 12 संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया गया है। खबरों में कहा गया है कि गिरफ्तार किए गए लोगों में कोई प्रमुख संदिग्ध नहीं और जांच में कोई उल्लेखनीय सफलता हासिल नहीं हुई है। पंजाब प्रांत की सरकार ने हमलों के जिम्मेदार आतंकवादियों और उनके साथियों की गिरफ्तारी के लिए पुख्ता जानकारी के लिए एक करोड़ रुपये इनाम देने की पेशकश की है।

भरोसा है कर्म और नियति में

मैं सुचित्रा कृष्णमूर्ति बुरे वक्त में मैं सबकुछ गणेशजी पर छोड़ देती हूं। मैं मानती हूं कि कोई उच्च शक्ति मेरा ख्याल रखेगी। मैं कर्म और नियति में भी भरोसा रखती हूं। मेरा मानना है कि जीवन एक यात्रा है और खुशियां हमारा धर्म। पहले के मुकाबले मेरे जीवन की उलझनें कम हुई हैं हालांकि अभी एक बहुत ही लंबा रास्ता बाकी है। खुद को इस लिहाज से आध्या त्मिक समझती हूं कि मैं ईश्वर में गहरी आस्था रखती हूं। मेरा यह भी मानना है कि ईश्वर किसी एक खास स्वरूप में विद्यमान नहीं रहता पर सर्वव्यापी है। यह वह एनर्जी फील्ड या चेतना का स्तर है जहां हम पहुंच सकते हैं यदि हम खुद को खुला रखें। मूर्तियों में मैं ईश्वर को नहीं तलाशती लेकिन कभी - कभी मुझे किसी मूर्ति में भी ईश्वर का एहसास हुआ है। मेरे हिसाब से ईश्वर वह है जिसे आप मन से महसूस कर सकते हैं। धार्मिक तो इतनी हूं कि पूजा - पाठ या परंपराओं का पालन मेरे जीवन का अहम हिस्सा है। एक अति धार्मिक परिवार में बड़े होने की वजह से यह मेरी परवरिश का एक अंग रहा है। मेरे पिता के पूर्वज मंदिर के पुजारी थे। अपनी जिंदगी में खासे समय तक मैंने परंपराएं निबाहीं पर बिना किसी आस्था के। यह तो जब मैंने खुद को उसके हवाले कर दिया तब मेरी जिंदगी ने करवट बदली। मेरी परवरिश बहुत धार्मिक और पारंपरिक थी। और प्रार्थना एक ऐसी चीज़ थी जिस पर मेरे माता - पिता का सबसे ज़्यादा ज़ोर था ! मुझे याद है घर पर किस तरह पूजा होती थी। अगरबत्ती की सुगंध , इस अवसर पर पकाए गए पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू , मां की कांजीवरम साड़ियां , घंटी की टनटन और मेरी लगातार कोशिश कि नीचे भाग जाऊं और खेलूं। मैं हर पूजास्थल पर जाती हूं - चाहे वह गुरुद्वारा हो या चर्च या मंदिर या दरगाह - और मुझे ऐसा करना पसंद है। इससे मुझे वहां के माहौल में तैरती ऊर्जा और तरंगों को आत्मसात करने का मौका मिलता है। मैं भाग्यशाली टोटकों या ताबीजों में भरोसा नहीं रखती लेकिन अपनी बिटिया को नजर न लगने का टीका ज़रूर लगाती हूं। मुझे बुरी नज़र में विश्वास है और इस बात में भी कि दूसरों की ऊर्जा हमें प्रभावित करती है। मैंने रत्न वगैरह भी पहने लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया क्योंकि मुझे लगा कि अंततः हम या हमारे आसपास के लोग जो सोचते हैं , उसका ही प्रभाव हमारे वर्तमान और भविष्य पर पड़ता है। मैं नकारात्मक सोच वाले लोगों से दूर ही रहती हूं। NBT