Saturday, May 30, 2009

आंगनबाड़ी की खिचड़ी में मरा हुआ केंचुआ

पूर्वी दिल्ली में न्यू संजय अमर कॉलोनी में चल रही आंगनबाड़ी में बांटी जाने वाली खिचड़ी में
मरा हुआ केंचुआ मिलने के बाद लोगों ने जमकर हंगामा किया। लोगों का कहना है कि कुछ दिन पहले भोजन में मरा हुआ कॉकरोच मिला था। लोगों का कहना है कि अब वे यह खाना अपने बच्चों को नहीं खाने देंगे। न्यू संजय अमर कॉलोनी को चार ब्लॉक में बांटा गया है। यहां हर ब्लॉक में दो-तीन आंगनबाड़ी चलती है। दिल्ली सरकार की तरफ से इन आंगनबाड़ियों के जरिए यहां रहने वाले गरीब बच्चों को भोजन दिया जाता है। हर रोज की तरह यहां सी ब्लॉक की एक गली में भोजन सप्लाई करने वाली संस्था का एक कर्मचारी रिक्शा लेकर आया और खाने के दो डिब्बे छोड़कर चला गया। इसी ब्लॉक में रहने वाली सुनीता नामक महिला अपने बच्चों के लिए खाना लेने पहुंची। उसने खुद ही डिब्बे से अपने बर्तन में खिचड़ी डालनी शुरू कर दी। सुनीता ने बताया कि जैसे ही उसने डिब्बे से खिचड़ी निकालकर अपने बर्तन में डाली तो उसमें मरा हुआ केंचुआ निकला। महिला ने खिचड़ी से मिला केंचुआ आसपास के लोगों को भी दिखाया। देखते ही देखते यहां लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और हंगामा शुरू हो गया। इसी कॉलोनी में रहने वाली रेखा ने बताया कि एक सप्ताह पहले खाने से मरा हुआ कॉकरोच निकला था। उसके बाद से उन्होंने खाना लेना बिल्कुल बंद कर दिया है। यहां के लोगों ने बताया कि इससे पहले आंगनबाड़ी में बच्चों को बिस्कुट, मुरमुरे और भुने हुए चने आदि खाने के लिए दिए जाते थे। जब से यह पका हुआ भोजन मिलना शुरू हुआ है तब से इस तरह के मामले सामने आ रहे है। महिलाओं ने खिचड़ी दिखाते हुए कहा कि चने की दाल ठीक से पकी नहीं हुई है। इस तरह का भोजन खाने से बच्चे तो बीमार होंगे ही। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि सरकार गरीब बच्चों को अच्छा भोजन नहीं दे सकती तो कम से कम इस तरह का दूषित खाना भी न बंटवाए। वहीं दूसरी तरफ आंगनबाड़ी की इंचार्ज सिमरन का कहना है कि मरा हुआ केंचुआ उनके खाने के डिब्बों से नहीं मिला। NBT

घर होगा पावरहाउस, आप सोलर सेलर

बिजली कंपनी एनडीपीएल ने एक ऐसा प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत उपभोक्ता अपने घर पर सोलर पैनल लगाकर दिन के समय कंपनी को सोलर एनर्जी बेच सकेंगे। जरूरत पड़ने पर वे कभी भी उसी दर पर कंपनी से वापस बिजली ले सकेंगे। अगर दिन के समय सोलर एनर्जी 3 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिकी तो रात के समय इसी दर पर उपभोक्ता को बिजली मिल जाएगी। यानी रात के वक्त उसे बिजली की कोई कीमत नहीं चुकानी पड़ेगी। एनडीपीएल के सीईओ सुनील वाधवा के मुताबिक इस योजना के तहत उपभोक्ताओं के पास कम से कम 100 गज की छत होनी चाहिए। 100 गज की छत पर ही 1 किलोवॉट क्षमता का सोलर पैनल लग सकता है। इतनी क्षमता के पैनल से सामान्य बिजली खपत वाले सभी घरेलू उपकरण चलाए जा सकते हैं। सोलर एनर्जी को स्टोर नहीं किया जा सकता। उसे उसी वक्त इस्तेमाल करना होता है। अगर आप इस बिजली का पूरा इस्तेमाल न कर पाएं तो कंपनी आपके घर से अपने सिस्टम के जरिए सोलर एनर्जी अन्य उपभोक्ताओं तक पहुंचाएगी। रात के वक्त या जब भी उपभोक्ता को जरूरत होगी वह बिजली सप्लाई कर देगी। कैश लेना चाहें तो कैश भी ले सकते हैं। 1 किलोवॉट का सोलर पैनल लगाने में करीब 2 लाख रुपये का खर्चा आता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सब्सिडी देने के लिए प्रस्ताव दिल्ली सरकार को भेजा गया है। 2 लाख रुपये में से अगर 1 लाख 20 हजार रुपये की सब्सिडी दिल्ली सरकार दे देती है तो उपभोक्ता को केवल 80 हजार रुपये खर्च करने होंगे। बिजली कंपनी बैंकों और वित्तीय संस्थानों से बातचीत कर रही है, ताकि उपभोक्ता को लोन मिल जाए। वाधवा के मुताबिक एक बार सोलर पैनल लगाने के बाद उसका मेंटिनेंस का कोई खर्चा नहीं होता है। यह 20 साल से भी ज्यादा चल सकता है। उपभोक्ता को हर साल 12 फीसदी की दर से रिटर्न मिलता रहेगा। एनडीपीएल ने यह प्रस्ताव दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) और दिल्ली सरकार को भेज दिया है। कंपनी की ओर से दावा किया गया है कि मंजूरी मिलते ही इसे 15 दिन के अंदर लागू कर दिया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एनडीपीएल ने 4 किलोवॉट सोलर एनर्जी का पैनल रोहिणी ट्रेनिंग सेंटर और अपने हेड ऑफिस में लगाया है। वहां सोलर एनर्जी के जरिये लैपटॉप और कंप्यूटरों को चलाया जा रहा है। NBT

Friday, May 29, 2009

अंतिम अभियान में 20 हजार आम नागरिक मारे गए

लिट्टे के छापामारों को खत्म करने के लिए श्रीलंका सेना के अंतिम अभियान में 20 हजार से अधिक आम नागरिक मारे गए। इनमें से अधिकतर की जान श्रीलंकाई सेना की गोलाबारी में गई। टाइम्स अखबार द्वारा की गई जांच में खुलासा हुआ है कि अंतिम चरण के युद्ध में 20 हजार से अधिक नागरिक मारे गए। मौतों का यह आंकड़ा सरकारी आंकड़ों से तीन गुना अधिक है। नागरिकों की मौतों का दोष लिट्टे विद्रोहियों पर मढ़ते हुए श्रीलंका के सरकारी अधिकारियों ने 27 अप्रैल को कहा था कि उन्होंने भारी हथियारों का प्रयोग रोक दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हवाई तस्वीरों और आधिकारिक दस्तावेजों से साबित होता है कि सीब्रेनिका और दारफुर जैसे कई जगहों पर आम नागरिकों का कत्लेआम किया गया।

चोरों से महफूज नहीं डॉन का हथियार खाना

दाऊद इब्राहिम भले ही कितना बड़ा डॉन क्यों न हो, लेकिन खुद उसका हथियार खाना चोरों से महफूज नहीं है। गुरुवार को मुंबई क्राइम ब्रांच ने जिन 917 कारतूसों को जब्त किया, विश्वस्त सूत्रों के अनुसार ये सारे कारतूस दाऊद के हथियारखाने से ही चुराए गए थे। इन्हें चुराने वाला शख्स कोई डी कंपनी का आदमी नहीं, बल्कि एक मामूली चोर मकसूद खान था। उसे गुरुवार को कारतूसों के मिलने के बाद अरेस्ट किया गया। सूत्रों के अनुसार मकसूद के पास से जो कारतूस मिले थे, वे कारतूस उसने दक्षिण मुंबई की टो टाकी इलाके की एक मिल से चुराए थे। सूत्रों का दावा है कि करीब दस साल से बंद पड़ी इस मिल का दाऊद इब्राहिम बतौर हथियारखाना इस्तेमाल कर रहा था। दाऊद के कारखाने से कोई चोर कारतूस निकालेगा, दाऊद तो छोडि़ए खुद पुलिस या क्राइम ब्रांच अधिकारियों ने भी इसकी कल्पना नहीं की थी।
सूत्रों के अनुसार मकसूद खान ने न तो कभी डी कंपनी के लिए काम किया था और न ही उसे मालूम था कि यहां कारतूस रखे हैं। वह मिल कबाड़ चुराने के इरादे से घुसा, लेकिन इसी दौरान उसके हाथ कारतूस लग गए। इन्हें मिल के एक कोने में छिपाकर रखा गया था। मकसूद को लगा कि इनसे उसे मोटी रकम मिल सकती है, इसलिए वह इन्हें बेचने निकला और पकड़ा गया। पुलिस ने उसके पास से 500 कारतूस तो तब जब्त किए, जब वह पकड़ा गया। इसके बाद उससे पूछताछ में 417 कारतूस नल बाजार में स्थित एक सुलभ शौचालय की छत से मिले, जो मकसूद ने वहां छिपाकर रखे थे। जिस इलाके की बंद मिल से ये कारतूस मकसूद ने चुराये थे, दरअसल वह इलाका दाऊद का ही माना जाता है। दाऊद इब्राहिम का पुस्तैनी घर जिस पाकमोडिया इलाके में है, वह यहां से मुश्किल से आधा किलोमीटर दूर है। यही नहीं छोटा शकील का अड्डा टेमकर मोहल्ला भी पास में ही है। जिस मिल के अंदर से ये कारतूस मकसूद को मिले, वह पहले तेल की मिल थी। लेकिन पार्टनरों के आपसी विवाद की वजह से मिल करीब दस साल पहले बंद हो गई थी और धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो गई। लेकिन सूत्रों के अनुसार बाद में शायद डी कंपनी को लगा कि ये खंडहर तो अपने लिए बहुत फायदेमंद है, इसलिए डी कंपनी ने यहां अपने लिए कारतूस और हथियार भी छिपाने शुरू कर दिए। फिलहाल तो क्राइम ब्रांच अधिकारियों को सिर्फ कारतूस ही मिले हैं। पुलिस और जांच एजंसियां अब मिल के दूसरे कोनों में हथियारों की तलाश कर रही है।NBT

25 रु. की रिश्वत, 20 साल बाद सुप्रीम कोर्ट से बरी

बीस वर्ष पहले 25 रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार केरल के कर्मचारी सुबैर को सुप्रीम कोर्ट ने आरोप मुक्त कर दिया है। सुबैर आरटीओ में पदस्थ था। उसे अप्रैल 1989 में मुनाफ से 25 रु. की रिश्वत लेने का आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
शीर्ष कोर्ट की जस्टिस वीएस सिरपुरकर व आरएम लोढा की वेकेशन बेंच ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश सबूतों को ठोस नहीं मानते हुए सजा कायम रखने के लिए इन्हें अपर्याप्त बताया। तिरुअनंतपुरम की स्थानीय कोर्ट ने सुबैर को दोषी ठहराते हुए छह माह की सजा सुनाई थी। बाद में हाईकोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा था। लेकिन दोनों कोर्ट में मामले की सुनवाई में 15 वर्ष गुजर गए। सुबैर ने न्याय के लिए 2004 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष गुहार लगाई थी।BHA

मुश्किल होगा घर की ड्यूटी" बजाना

अब सरकारी ड्यूटी पर रहते हुए "घर की ड्यूटी" बजाना मुश्किल होगा। सरकारी वाहन में सवार पुलिसकर्मी अपनी तय स्थान पर मौजूदगी के बारे में झूठ बोलने पर तत्काल पकडे जाएंगे। यह सम्भव हुआ है ग्लोबल पॉजिशनिंग रेडियो सिस्टम (जीपीआरएस) के जरिए। पुलिस वाहनों को 17 मई से इस सिस्टम को कन्ट्रोल रूम से जोड दिया गया है। इससे कन्ट्रोल रूम में लगे एलसीडी स्क्रीन पर पुलिस वाहन की मौजूदगी के बारे में पल-पल की जानकारी मिल सकेगी। कन्ट्रोल रूम से सीधा आदेशपुलिस वाहनों में लगे जीपीआरएस यंत्र में एक सिम लगाई गई है, जो बीएसएनएल इंटरनेट के जरिए पुलिस कन्ट्रोल रूम में लगे एलसीडी स्क्रीन से जुडी है। सम्बन्घित पुलिस वाहन को अलग-अलग रंग व नम्बर से पहचान दी गई है। सम्बन्घित वाहन के चित्र पर क्लिक करते ही गाडी नम्बर व उसकी स्थिति के बारे में स्क्रीन पर सूचना आ जाएगी। स्क्रीन पर पुलिस वाहन की लोकेशन देखकर उसे नजदीकी क्षेत्र में आपातस्थिति होने पर नियंत्रित करने के लिए पहुंचने के आदेश भी दिए जा सकेंगे। 100 वाहन जुडे सिस्टम के तहत कन्ट्रोल रूम के पास सभी वाहनों की लोकेशन की पल-पल की जानकारी है। शुरूआत में ग्रामीण के पांच व शहर के सभी थानों के वाहनों सहित इसे 100 पुलिस गाडियों में लगाया गया है।जीपीआरएस से वाहनों की तत्काल लोकेशन मिलेगी। यदि कहीं आपातस्थिति होगी तो एलसीडी स्क्रीन पर उसके नजदीक के वाहन को तत्काल वहां भेजा जा सकेगा। यह कार्य प्रणाली 17 मई से चालू हो गई है।Rpt

नेपाल से सटी हुई सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी

नेपाल में बदले हुए राजनैतिक हालात के चलते खटीमा तथा नेपाल से सटी हुई सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इन क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर उन्हें आने-जाने वालों पर कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। सूत्रों के अनुसार नेपाल में दूसरे प्रधानमंत्री के पद संभालने के बाद ही खटीमा आने-जाने वालों पर कड़ी निगरानी रखनी शुरू कर दी गई थी। वरिष्ठ अधिकारियों ने नेपाल जाने वाले रास्तों का भी जायजा लिया है।