Wednesday, February 4, 2009

स्वास्थ्य के लिए घातक ट्रांस फ़ैट

भारत में एक अध्ययन में पाया गया है कि खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाले बाज़ार में उपलब्ध अनेक तेल ऐसे हैं जिनमें ट्रांस फ़ैट की मात्रा बहुत अधिक है।
ट्रांस फ़ैट दिल के स्वास्थ्य के लिए घातक माना जाता है क्योंकि ये लाभदायक कॉलेस्टेरॉल की मात्रा घटा देता है। ये अध्ययन एक ग़ैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरनमेंट (सीएसई) ने किया है। सीएसई ने बाज़ार में उपलब्ध तेल, वनस्पति घी, मक्खन और घी बनाने वाली तीस कंपनियों के उत्पादों की जाँच के बाद पाया कि इन सभी उत्पादों में ट्रांस फ़ैट की मात्रा ज़रूरत से कई गुना अधिक है। ट्रांस फ़ैट एक असंतृप्त वसा है जो खाद्य तेल की जीवन अवधि बढ़ाने में सहायक होता है। सीएसई की प्रमुख सुनीता नारायण का कहना है, "ट्रांस फ़ैट स्वास्थ्य के लिए घातक होता है, ख़ासकर दिल के लिए, क्योंकि ये लाभदायक कॉलेस्टेरॉल की मात्रा को कम कर देता है। इससे कैंसर और मधुमेह जैसी बीमारियाँ होने का ख़तरा बढ़ जाता है।" सुनीता का कहना है कि ट्रांस फ़ैट महिलाओं में बांझपन का ख़तरा बढ़ा देता है। सीएसई की जाँच में सभी ब्रांड के वनस्पति घी में ट्रांस फ़ैट की मात्रा डेनमार्क में स्थापित मानक के मुकाबले में पाँच से 12 गुना अधिक पाई गई। सुनीता का कहना है, "अध्ययन के अनुसार अगर डेनमार्क के मानक से तुलना की जाए तो भारत में किसी भी खाद्य तेल के स्वास्थ्य के लिए सही होने के बारे दावा नहीं किया जा सकता है।" उनका कहना है कि दुनिया के कई देश खाद्य तेल में ट्रांस फ़ैट के इस्तेमाल की निगरानी करते हैं और भारत में भी खाद्य पदार्थों की निगरानी करने वाली संस्था ने ट्रांस फ़ैट को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया है। सुनीता के अनुसार वर्ष 2004 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने ट्रांस फ़ैट के मानक को तय करने पर विचार करना शुरु किया और वर्ष 2008 में सेंटर कमेटी फ़ॉर फूड को इस सिलसिले में एक प्रस्ताव भी भेजा था लेकिन इस पर फ़ैसला लिया जाना अभी भी बाक़ी है। अध्ययन के अनुसार ट्रांस फ़ैट की मात्रा सबसे अधिक वनस्पति घी और फिर वनस्पति तेल में है जबकि इसकी सबसे कम मात्रा घी और मक्खन में पाई जाती है।

श्रीलंका की सेना और तमिल विद्रोहियों के संघर्ष में पहली बार आम नागरिक मारे गए

श्रीलंका की सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच चल रहे संघर्ष में इतनी बड़ी संख्या में पहली बार आम नागरिक मारे गए हैं। सेना ने कहा है कि दोनों अस्पतालों में बम गिराने में उसका कोई हाथ नहीं है। तमिल विद्रोहियों की ओर से इस पर कोई बयान नहीं आया है। इस बीच श्रीलंका के राष्ट्रपति महेंद्रा राजपक्षे ने देश छोड़कर गए लोगों से वापस लौटने की अपील करते हुए कहा है कि 'तमिल विद्रोही कुछ ही दिनों में पूरी तरह परास्त' हो जाएँगे। श्रीलंका बुधवार को अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा है और इस आयोजन में भाषण करते हुए राष्ट्रपति ने यह टिप्पणी की है। जिन दो अस्पतालों पर क्लस्टर बम डाल गए हैं उनमें से एक तो वह है जिसे पिछले पिछले कुछ दिनों में पाँच बार निशाना बनाया गया है और बम हमले किए गए हैं। मलाइतिवु ज़िले के पुतुकुदीयिरुप्पु में स्थित इस अस्पताल पर जब क्लस्टर बम गिराए गए तो अस्पताल खाली पड़ा था। लेकिन इस अस्पताल से कोई 20 किलोमीटर दूर स्थित सुधांतिपुरम के एक अस्थाई अस्पताल में पर हुए गोलाबारी में कम से कम 52 नागरिकों की मौत हुई है। समाचार एजेंसी एपी का कहना है कि यह अस्पताल जिस इलाक़े में स्थित है वहाँ तमिल विद्रोहियों के अलावा ढाई लाख आम नागरिक फँसे हुए हैं। समाचार एजेंसियों का कहना है कि वर्ष 2006 में सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच शांतिवार्ता टूटन के बाद से जो संघर्ष शुरु हुआ है उसमें पहली बार क्लस्टर बमों का उपयोग किया गया है। उधर स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाषण देते हुए राष्ट्रपति महेंद्रा राजपक्षे ने कहा है कि सरकार 'आतंक को ख़त्म करने के क़रीब' पहुँच गई है। उन्होंने कहा, "मैं देश छोड़कर चले गए श्रीलंका के सभी समुदायों से अपील करता हूँ कि वे वापस लौट आएँ।" इस बीच सरकार और तमिल विद्रोहियों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का दबाव बना हुआ है कि वे संघर्ष विराम करें। श्रीलंका को आर्थिक मदद देने वाले अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं ने तमिल विद्रोहियों से अनुरोध किया है कि वे हथियार डाल दें और संघर्ष समाप्त कर दें ताकि आम नागरिकों को निशाना बनने से बचाया जा सके। अमरीका, यूरोपीय संघ और नोर्वे ने कहा कि इसमें अब ज्यादा वक्त नहीं लगेगा जब विद्रोही सभी इलाक़ों पर अपना नियंत्रण खो देंगे। उनका कहना है कि दोनों पक्षों को ये महसूस करना चाहिए कि लोगों की मौत से कुछ हासिल नहीं होने वाला है।

Monday, February 2, 2009

खुलेआम अपने प्यार का इजहार कानून की नज़र में ग़लत नहीं !

क्या शादीशुदा जोड़ा पब्लिक प्लेस पर खुलेआम अपने प्यार का इजहार कर सकता है ? यह सवाल आपके मन में कभी न कभी आया जरूर होगा। तो इस सवाल का जवाब है कि कम से कम कानून की नज़र में ऐसा करना ग़लत नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक केस की सुनवाई के दौरान यह कहा है कि किसी भी नौजवान शादी-शुदा जोड़े द्वारा पब्लिक प्लेस में एक दायरे के भीतर प्यार का इजहार करना कानून की नज़र में ग़लत नहीं है। द्वारका के रहने वाले (अजीत बदला हुआ नाम) और उनकी पत्नी पर आरोप है कि दोनों पब्लिक प्लेस पर एक-दूसरे का चुंबन ले रहे थे। दोनों के खिलाफ द्वारका पुलिस ने पब्लिक प्लेस पर अश्लील हरकत करने का मामला बनाते हुए एफआईआर दर्ज किया था। आर्य समाज में शादी कर चुके इस जोड़े के उस समय रजिस्टर्ड मैरिज के कागजों का इंतजार था। इस मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने आपराधिक मुकदमे पर स्टे लगा दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट के जज एस.मुरलीधर ने स्टे लगाते हुए अपनी व्यवस्था में कहा है कि कि मौजूदा मामला आईपीसी की धारा 34 के सेक्शन 294 (अश्लीलता) के तहत नहीं आता है। जज ने आगे कहा कि अगर एफआईआर के मुताबिक भी केस को देखें तो यह समझ से परे है कि किसी नौजवान शादीशुदा जोड़े द्वारा प्यार का इजहार करना अश्लीलता के दायरे में आएगा और कानून तोड़ेगा। अब इस मामले में अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी , जब शादीशुदा जोड़े द्वारा पुलिस के खिलाफ प्रताड़ना के आरोप पर की गई कार्रवाई के बाबत जवाब देना होगा। शादीशुदा जोड़े ने पुलिस कमिश्नर के यहां इस मामले की लिखित शिकायत की है। गौरतलब है कि पिछले साल चार सितंबर को शादीशुदा जोड़े को द्वारका पुलिस थाने के एएसआई विद्याधर सिंह ने पकड़ लिया था। एएसआई का दावा था कि शादीशुदा जोड़ा एक मेट्रो पिलर के पास आपत्तिजनक हालत में बैठकर एक दूसरे को चूम रहा था , जिससे आसपास गुजरने वाले लोगों को बुरा लग रहा था। यहां तक की अजीत ने पुलिस वालों से कहा कि वह दोनों पति-पत्नी हैं , बावजूद इसके दोनों को गिरफ्तार कर पुलिस थाने ले गई। जोड़े को थाने से ही ज़मानत दे दी गई। हाई कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई है कि पुलिस ने किस तरह इस तथ्य को अनदेखा करते हुए कि दोनों शादीशुदा हैं , एफआईआर दर्ज कर दी। और तो और एफआईआर या उसके बाद दाखिल की गई चार्जशीट में पुलिस ने किसी चश्मदीद की गवाही बतौर सबूत नहीं पेश की , जिससे कोर्ट के सामने साफ हो गया है कि आरोप मनगढ़ंत थे। अजीत ने यह पुलिस और बार काउंसिल के सामने यह आरोप भी लगाया है कि जिस वकील ने उन्हें मैरिज रजिस्ट्रेशन की औपचारिकताएं पूरी कराने का वादा किया था , उसने विद्याधर सिंह के साथ मिलकर वसूली करने की योजना बनाई। अजीत ने कहा है कि उन्हें कानून की बारीकियां नहीं पता थीं , इसलिए वह पुलिस-वकील के चंगुल में फंस गए। हाई कोर्ट में दायर याचिक में अजीत ने यह बताया कि किस तरह पुलिस द्वारा पूछताछ के दौरान उनके एटीएम कार्ड का दुरूपयोग करते हुए बीस हजार रुपये निकाल लिए गए। अजीत ने कहा कि उन दोनों की शादी सितंबर के पहले सप्ताह में एक आर्यसमाज मंदिर में हुई थी , जिसके बारे में दोनों के परिजनों को पता नहीं था। यही वजह थी कि दोनों शादी के बाद भी अलग रह रहे थे और रजिस्टर्ड मैरिज की कोशिश में थे। इसी कोशिश में उन्होंने वकील की मदद ली , जिसने बाद में जोड़े को धोखा दिया। हाई कोर्ट में दायर याचिक में अजीत ने यह भी कहा कि वह दोनों एक-दूसरे को चूम नहीं रहे थे , बल्कि मोबाइल से एक साथ दोनों की फोट खींच रहे थे। हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान अजीत का पक्ष पेश कर रहे वकील ने अश्लीलता के कानून की बारीकियों पर रोशनी डालने की कोशिश की। टाइम्स से बात करते हुए वकील ने कहा कि अश्लीलता के आरोप तब सही होते हैं जब वह वाकई इतना ज़्यादा अभद्र हो कि लोगों को शर्मिंदगी झेलनी पड़े। वकील के मुताबिक पेश मामले में इस तरह की बात नहीं है क्योंकि चार्जशीट में कहीं भी किसी चश्मदीद का बयान नहीं है।

पाकिस्तान की महिलाएं कम कुख्यात नहीं है

अब तक आतंकवादियों की शरण स्थली और जन्मभूमि बन गई पाकिस्तान के केवल पुरूष ही नहीं यहां की महिलाएं भी इतनी खतरनाक है कि वह आम व्यक्ति का रेप कर सकती है। कराची पुलिस ने एक युवक को किडनैप करने और उसके साथ बलात्कार करने के आरोप में तीन अज्ञात महिलाओं के खिलाफ केस दर्ज किया है। इन महिलाओं पर आरोप है कि इन्होंने एक युवक को अगवा करके चार दिनों तक उसके साथ रेप किया और बाद में उसे कयामाबाद नदी के पास फेंक दिया। पीड़ित युवक की पहचान खलील के रूप में हुई है। 23 वर्षीय खलील एक रेस्तरां में वेटर के रूप में काम करता है। डेली टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित ने बताया कि 27 जनवरी की रात को एक अज्ञात व्यक्ति ने रेस्तरां में आकर बाहर कार में बैठीं महिलाओं को खाना देकर आने का ऑर्डर दिया। ऑर्डर देने के बाद वह व्यक्ति कार की तरफ चला गया। खाना देने के लिए जैसे ही खलील कार की तरफ गया, कार में बैठीं महिलाएं ने कहा कि वह इस इलाके में नई हैं और उन्हें इलाके की जानकारी नहीं है।
महिलाओं ने खलील से कहा कि वह उनके घर रोज खाना पहुंचा दिया करे और उनके साथ चलकर उनका घर देख ले। लेकिन जैसी ही खलील उनके घर पहुंचा महिलाओं ने उसे दूध दिया, जिसमें कोई नशीला पदार्थ मिला हुआ था। उसके बाद वह बेहोश हो गया। जैसे ही खलील को होश आया उसने देखा कि एक महिला उसके साथ गलत व्यवहार कर रही है। पुलिस अधिकारी असद रज़ा ने बताया- महिलाओं ने चार दिन तक खलील के साथ दुराचार किया और उसके बाद उसे कयामाबाद नदी के पास फेंक दिया। खलील की हालत काफी खराब है। उसके गुप्तांग से खून निकल रहा है औक वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा है। रज़ा ने कहा- महिलाएं कराची के पॉश इलाके क्लिफटन की हैं और अमीर परिवारों से ताल्लुक रखती हैं। रज़ा ने कहा- यह केस काफी जटिल है, लेकिन हमें उम्मीद है कि हम जल्द ही इस मामले को सुलझा लेंगे। NBT

उसके तो अपनो ने खून कर दिया रिश्तो का

अपने कब बेगाने हो जाते है इसका एक वायका दिल्ली के लोदी कॉलोनी में देखने को मिला जहां एक बालिका अपने खून के सगे से बचने के लिए स्कूल की मेडम से गुंहार लगा रही है। बाप, चाचा और भाइयों की गिरफ्तारी से तीन मासूम लड़कियां और उनके दो अबोध भाई राहत की सांस ले रहे हैं। दरअसल, इन तीनों ने इन रिश्तों को नासूर बना दिया था। मुलजिमों को उनके अंजाम तक पहुंचाया इन बच्चों की टीचर ने। एनबीटी से बातचीत में टीचर ने इसका श्रेय एसएचओ (लोदी कॉलोनी) राजेंद्र सिंह को दिया। लोदी कॉलोनी के 'नगर पालिका प्राइमरी गर्ल्स स्कूल' में पढ़ाने वाली टीचर ने बताया कि उनकी क्लास में 12 साल की स्टूडंट मनीषा (बदला हुआ नाम) बहुत परेशान रहती थी। पूछने पर भी मनीषा वजह नहीं बताती थी। एक दिन मनीषा अपनी सहेली के साथ टीचर के घर पहुंची। उसने रोते हुए बताया कि उसका पिता उससे और दो छोटी बहनों से रेप करता है। मना करने पर वह उन्हें बुरी तरह पीटता है और भूत-प्रेत बुलाने की बात कहकर डराता है। मनीषा के मुताबिक, उसने ऐसा नहीं करने की प्रार्थना कागज पर लिखकर अपने पिता को दी थी। उसके पिता ने उस कागज को जला दिया था। मनीषा की छोटी बहनों की उम्र 10 और 8 साल है। मनीषा ने आग्रह किया कि उसके पिता को गिरफ्तार कराने के बजाय समझाया जाए। उसकी मां का देहांत पांच साल पहले हो चुका है। उसने बताया कि पिछले एक साल से उसका चाचा रामबाबू, बुआ का लड़का प्रेम और ममेरा भाई विनोद कई बार उससे गलत काम कर चुके हैं। टीचर ने मनीषा के पिता को अपने घर बुलाया। रेडीमेड कपड़ों की रेहड़ी लगाने वाले उनके पिता ने टीचर के पैर पकड़कर और लिखित माफीनामा देकर आइंदा ऐसा न करने का वादा किया। एक हफ्ते बाद 26 जनवरी को मनीषा का पिता उसे गुड़गांव ले गया। उसने वहां मनीषा को बंधक बनाकर अपने छोटे भाई के पास रखा। फिर उसे गुड़गांव छोड़कर 30 जनवरी को वापस लोदी कॉलोनी आया। 31 जनवरी को मनीषा की छोटी बहन रचना (बदला हुआ नाम) ने रोते हुए अपनी सहेली को रात में हुई वारदात के बारे में बताया। दोनों लड़कियां टीचर के पास गईं। वहां रचना ने बताया कि रात में उसके बाप ने उससे रेप किया। यह वारदात उसके तीन छोटे भाई-बहनों ने भी देखी थी। इसके बाद रचना से उसकी बुआ के लड़के ने भी गलत काम किया। NBT

ओबामा के इस्तीफे के ईमेल में छिपा है ट्रोजन वायरस

अगर आपको अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के इस्तीफे के बारे में कोई ई-मेल मिलता है तो सावधान हो जाइए। यह ईमेल संदेश आपके कंप्यूटर को नुकसान पहुंचाने वाला ट्रोजन वायरस हो सकता है। समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार ऐंटी वायरस बनाने वाली प्रयोगशाला सोफोज ने बताया है कि ओबामा के अचानक इस्तीफे संबंधी इन संदेशों का एकमात्र उद्देश्य उपभोक्ता के कंप्यूटर में वायरस डालना होता है और ऐसे संदेशों को किसी भी सूरत में नहीं खोलना चाहिए। अगर आप इस लिंक को खोलते हैं तो यह आपको एक ऐसी वेबसाइट पर ले जाता है जो बिल्कुल ओबामा की आधिकारिक साइट की तरह दिखती है। इसके साथ ही ट्रोजन नामक वायरस आपके कंप्यूटर में प्रवेश कर जाता है। सोफोस के मुताबिक यह पहला मौका नहीं है जब साइबर जगत के अपराधियों ने ओबामा की लोकप्रियता का लाभ उठाने की कोशिश की है। इससे पहले नवंबर 2008 में राष्ट्रपति पद के चुनावों के तत्काल बाद भी ऐसा एक वीडियो जारी करने की कोशिश की गई थी।

कॉल दरों में 70 फीसदी तक की गिरावट

फोन कॉल दरों में भारी कमी की तैयारी चल रही है। ट्राई की सिफारिश के मुताबिक, फोन ग्राहकों ो यह सुविधा दी जाए कि वे अपनी पसंद के ऑपरेटर का कॉलिंग कार्ड खरीदकर एसटीडी और आईएसडी कर सकें। जानकारों का कहना है कि कॉलिंग कार्ड से कॉम्पिटिशन बढ़ने के कारण कॉल दरों में 70 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। इसके अलावा, ट्राई ने देश के अंदर होने वाली कॉल्स के लिए इंटरनेट टेलिफोनी की सुविधा दिए जाने की भी सिफारिश की थी। सरकार इन सिफारिशों को स्वीकार कर सकती है। इस बाबत सोमवार को बैठक होगी। ऐसा महसूस किया गया है कि ग्राहक को ऑपरेटर बदलने की सुविधा देने के तीन तरीके हैं। पहला, हर कॉल के लिए ऑपरेटर बदलने की सुविधा हो। दूसरा, ऑपरेटर का प्री-सिलेक्शन हो। तीसरा, कॉलिंग कार्ड की सुविधा दी जाए। इसमें पहले विकल्प के जरिये ग्राहकों को सबसे ज्यादा सुविधा मिलेगी। लेकिन इस सुविधा को मुहैया कराने का खर्च फिलहाल तर्कसंगत नहीं माना जा रहा है। इस पर भविष्य में सही वक्त पर विचार किया जा सकता है। कॉलिंग कार्ड पर ट्राई ने पिछले साल सिफारिश पेश करते हुए कहा था कि मौजूदा हालात में नेटवर्क बदलकर पसंद का ऑपरेटर चुनने की छूट देना हो सकता है कि उचित न हो। इस पर अमल में मुश्किलें आएंगी। कॉलिंग कार्ड की सुविधा बेहतर विकल्प है। टेलिकॉम डिपार्टमंट ने इस बारे में एक कमिटी बनाई। सूत्रों ने कहा कि इस कमिटी ने लंबी दूरी के लिए कॉलिंग कार्ड सुविधा दिए जाने की सिफारिश की है।