ट्रांस फ़ैट दिल के स्वास्थ्य के लिए घातक माना जाता है क्योंकि ये लाभदायक कॉलेस्टेरॉल की मात्रा घटा देता है। ये अध्ययन एक ग़ैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरनमेंट (सीएसई) ने किया है। सीएसई ने बाज़ार में उपलब्ध तेल, वनस्पति घी, मक्खन और घी बनाने वाली तीस कंपनियों के उत्पादों की जाँच के बाद पाया कि इन सभी उत्पादों में ट्रांस फ़ैट की मात्रा ज़रूरत से कई गुना अधिक है। ट्रांस फ़ैट एक असंतृप्त वसा है जो खाद्य तेल की जीवन अवधि बढ़ाने में सहायक होता है। सीएसई की प्रमुख सुनीता नारायण का कहना है, "ट्रांस फ़ैट स्वास्थ्य के लिए घातक होता है, ख़ासकर दिल के लिए, क्योंकि ये लाभदायक कॉलेस्टेरॉल की मात्रा को कम कर देता है। इससे कैंसर और मधुमेह जैसी बीमारियाँ होने का ख़तरा बढ़ जाता है।" सुनीता का कहना है कि ट्रांस फ़ैट महिलाओं में बांझपन का ख़तरा बढ़ा देता है। सीएसई की जाँच में सभी ब्रांड के वनस्पति घी में ट्रांस फ़ैट की मात्रा डेनमार्क में स्थापित मानक के मुकाबले में पाँच से 12 गुना अधिक पाई गई। सुनीता का कहना है, "अध्ययन के अनुसार अगर डेनमार्क के मानक से तुलना की जाए तो भारत में किसी भी खाद्य तेल के स्वास्थ्य के लिए सही होने के बारे दावा नहीं किया जा सकता है।" उनका कहना है कि दुनिया के कई देश खाद्य तेल में ट्रांस फ़ैट के इस्तेमाल की निगरानी करते हैं और भारत में भी खाद्य पदार्थों की निगरानी करने वाली संस्था ने ट्रांस फ़ैट को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया है। सुनीता के अनुसार वर्ष 2004 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने ट्रांस फ़ैट के मानक को तय करने पर विचार करना शुरु किया और वर्ष 2008 में सेंटर कमेटी फ़ॉर फूड को इस सिलसिले में एक प्रस्ताव भी भेजा था लेकिन इस पर फ़ैसला लिया जाना अभी भी बाक़ी है। अध्ययन के अनुसार ट्रांस फ़ैट की मात्रा सबसे अधिक वनस्पति घी और फिर वनस्पति तेल में है जबकि इसकी सबसे कम मात्रा घी और मक्खन में पाई जाती है।
Wednesday, February 4, 2009
स्वास्थ्य के लिए घातक ट्रांस फ़ैट
ट्रांस फ़ैट दिल के स्वास्थ्य के लिए घातक माना जाता है क्योंकि ये लाभदायक कॉलेस्टेरॉल की मात्रा घटा देता है। ये अध्ययन एक ग़ैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरनमेंट (सीएसई) ने किया है। सीएसई ने बाज़ार में उपलब्ध तेल, वनस्पति घी, मक्खन और घी बनाने वाली तीस कंपनियों के उत्पादों की जाँच के बाद पाया कि इन सभी उत्पादों में ट्रांस फ़ैट की मात्रा ज़रूरत से कई गुना अधिक है। ट्रांस फ़ैट एक असंतृप्त वसा है जो खाद्य तेल की जीवन अवधि बढ़ाने में सहायक होता है। सीएसई की प्रमुख सुनीता नारायण का कहना है, "ट्रांस फ़ैट स्वास्थ्य के लिए घातक होता है, ख़ासकर दिल के लिए, क्योंकि ये लाभदायक कॉलेस्टेरॉल की मात्रा को कम कर देता है। इससे कैंसर और मधुमेह जैसी बीमारियाँ होने का ख़तरा बढ़ जाता है।" सुनीता का कहना है कि ट्रांस फ़ैट महिलाओं में बांझपन का ख़तरा बढ़ा देता है। सीएसई की जाँच में सभी ब्रांड के वनस्पति घी में ट्रांस फ़ैट की मात्रा डेनमार्क में स्थापित मानक के मुकाबले में पाँच से 12 गुना अधिक पाई गई। सुनीता का कहना है, "अध्ययन के अनुसार अगर डेनमार्क के मानक से तुलना की जाए तो भारत में किसी भी खाद्य तेल के स्वास्थ्य के लिए सही होने के बारे दावा नहीं किया जा सकता है।" उनका कहना है कि दुनिया के कई देश खाद्य तेल में ट्रांस फ़ैट के इस्तेमाल की निगरानी करते हैं और भारत में भी खाद्य पदार्थों की निगरानी करने वाली संस्था ने ट्रांस फ़ैट को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया है। सुनीता के अनुसार वर्ष 2004 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने ट्रांस फ़ैट के मानक को तय करने पर विचार करना शुरु किया और वर्ष 2008 में सेंटर कमेटी फ़ॉर फूड को इस सिलसिले में एक प्रस्ताव भी भेजा था लेकिन इस पर फ़ैसला लिया जाना अभी भी बाक़ी है। अध्ययन के अनुसार ट्रांस फ़ैट की मात्रा सबसे अधिक वनस्पति घी और फिर वनस्पति तेल में है जबकि इसकी सबसे कम मात्रा घी और मक्खन में पाई जाती है।
श्रीलंका की सेना और तमिल विद्रोहियों के संघर्ष में पहली बार आम नागरिक मारे गए
Monday, February 2, 2009
खुलेआम अपने प्यार का इजहार कानून की नज़र में ग़लत नहीं !
पाकिस्तान की महिलाएं कम कुख्यात नहीं है
अब तक आतंकवादियों की शरण स्थली और जन्मभूमि बन गई पाकिस्तान के केवल पुरूष ही नहीं यहां की महिलाएं भी इतनी खतरनाक है कि वह आम व्यक्ति का रेप कर सकती है। कराची पुलिस ने एक युवक को किडनैप करने और उसके साथ बलात्कार करने के आरोप में तीन अज्ञात महिलाओं के खिलाफ केस दर्ज किया है। इन महिलाओं पर आरोप है कि इन्होंने एक युवक को अगवा करके चार दिनों तक उसके साथ रेप किया और बाद में उसे कयामाबाद नदी के पास फेंक दिया। पीड़ित युवक की पहचान खलील के रूप में हुई है। 23 वर्षीय खलील एक रेस्तरां में वेटर के रूप में काम करता है। डेली टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित ने बताया कि 27 जनवरी की रात को एक अज्ञात व्यक्ति ने रेस्तरां में आकर बाहर कार में बैठीं महिलाओं को खाना देकर आने का ऑर्डर दिया। ऑर्डर देने के बाद वह व्यक्ति कार की तरफ चला गया। खाना देने के लिए जैसे ही खलील कार की तरफ गया, कार में बैठीं महिलाएं ने कहा कि वह इस इलाके में नई हैं और उन्हें इलाके की जानकारी नहीं है।
महिलाओं ने खलील से कहा कि वह उनके घर रोज खाना पहुंचा दिया करे और उनके साथ चलकर उनका घर देख ले। लेकिन जैसी ही खलील उनके घर पहुंचा महिलाओं ने उसे दूध दिया, जिसमें कोई नशीला पदार्थ मिला हुआ था। उसके बाद वह बेहोश हो गया। जैसे ही खलील को होश आया उसने देखा कि एक महिला उसके साथ गलत व्यवहार कर रही है। पुलिस अधिकारी असद रज़ा ने बताया- महिलाओं ने चार दिन तक खलील के साथ दुराचार किया और उसके बाद उसे कयामाबाद नदी के पास फेंक दिया। खलील की हालत काफी खराब है। उसके गुप्तांग से खून निकल रहा है औक वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा है। रज़ा ने कहा- महिलाएं कराची के पॉश इलाके क्लिफटन की हैं और अमीर परिवारों से ताल्लुक रखती हैं। रज़ा ने कहा- यह केस काफी जटिल है, लेकिन हमें उम्मीद है कि हम जल्द ही इस मामले को सुलझा लेंगे। NBT
उसके तो अपनो ने खून कर दिया रिश्तो का
ओबामा के इस्तीफे के ईमेल में छिपा है ट्रोजन वायरस
अगर आपको अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के इस्तीफे के बारे में कोई ई-मेल मिलता है तो सावधान हो जाइए। यह ईमेल संदेश आपके कंप्यूटर को नुकसान पहुंचाने वाला ट्रोजन वायरस हो सकता है। समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार ऐंटी वायरस बनाने वाली प्रयोगशाला सोफोज ने बताया है कि ओबामा के अचानक इस्तीफे संबंधी इन संदेशों का एकमात्र उद्देश्य उपभोक्ता के कंप्यूटर में वायरस डालना होता है और ऐसे संदेशों को किसी भी सूरत में नहीं खोलना चाहिए। अगर आप इस लिंक को खोलते हैं तो यह आपको एक ऐसी वेबसाइट पर ले जाता है जो बिल्कुल ओबामा की आधिकारिक साइट की तरह दिखती है। इसके साथ ही ट्रोजन नामक वायरस आपके कंप्यूटर में प्रवेश कर जाता है। सोफोस के मुताबिक यह पहला मौका नहीं है जब साइबर जगत के अपराधियों ने ओबामा की लोकप्रियता का लाभ उठाने की कोशिश की है। इससे पहले नवंबर 2008 में राष्ट्रपति पद के चुनावों के तत्काल बाद भी ऐसा एक वीडियो जारी करने की कोशिश की गई थी।